Friday, August 21, 2026
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कृषि विज्ञान केंद्र पर जल संचयन एवं जल प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन

कृषि विज्ञान केंद्र पर जल संचयन एवं जल प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन

मिर्जामुराद – प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर ड्रॉप मोर क्रॉप अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई पद्धति की स्थापना हेतु उद्यान विभाग ने अपने कार्यक्रमों को धरातल पर वृहद रूप में उतारने हेतु कृषकों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी रूप से जागरूक करने का अभियान प्रारंभ किया है। इसी कड़ी में कृषि विज्ञान केंद्र वाराणसी पर गुरुवार को जल संचयन एवं जल प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया जिसमे 50 से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। उक्त कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि विधायक रोहनिया सुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है किसान भाई सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का अधिकतम लाभ लेते हुए अपनी आय बढ़ाये व जल को संरक्षण हेतु बहाव सिंचाईके स्थान पर आधुनिकतम तकनीकों जैसे ड्रिप सिचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई इत्यादि के प्रयोग को बढ़ावा दें, साथ ही साथ केंद्र पर चल रही आर्या परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षित युवाओं को प्रमाणपत्र व प्रदर्शन हेतु वर्मी बेड एच डी पी भी वितरित किया।
अपने स्वागत संबोधन में केंद्राध्यक्ष डॉ नरेंद्र रघुवंशी ने केंद्र द्वारा संचालित कार्यक्रमो की जानकारी दी। प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अनंत बहादुर सिंह ने बताया कि विगत 100 वर्षों में धरती का तापमान आधा डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है तथा वर्ष 2050 तक यह 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है इससे समुद्र का जल तो बढ़ेगा मगर जीवन में प्रयोग होने वाला जल दिनोंदिन घटता जा रहा है। उन्होंने आजादी के समय एक व्यक्ति पर 55 लाख लीटर पानी की उपलब्धता के सापेक्ष वर्तमान में 15 लाख लीटर से कम पानी की उपलब्धता को चिंताजनक बताया। डॉक्टर सिंह द्वारा ड्रिप सिंचाई के प्रयोग से 40% तक जल की बचत तथा 35 से 40% तक उपज वृद्धि के बारे में किसानों को तकनीकी जानकारियां दी गई ।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ ए0 के0 नेमा ने महाराष्ट्र और राजस्थान का उदाहरण देते हुए बताया कि जहां 500 से 600 मिली लीटर बरसात प्रतिवर्ष होती है उसकी तुलना में 1000 से 1200 लीटर बरसात वाले उत्तर प्रदेश में फल और साग भाजी का उत्पादकता कम है, ऐसी स्थिति में किसानों को अपने साग भाजी फसलों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर का प्रयोग बढ़ाना चाहिए और अपने संयंत्रों का रखरखाव मरम्मत करना किसान स्वयं सीख कर तरल उर्वरक का प्रयोग करते हुए अपनी लागत को 25% तक घटा सकते हैं। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ समीर पाण्डेय ने संरक्षित खेती पर, डॉक्टर नवीन कुमार सिंह ने बागवानी फसलों और मृदा सुरक्षा हेतु ड्रिप की महत्ता पर तथा डॉक्टर नरेंद्र प्रताप ने उर्वरक और पोषक तत्वों के प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त ने विभाग में संचालित योजनाओं के साथ-साथ टपक सिंचाई, मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर पर दिए जा रहे अनुदान के बारे में किसानों को विस्तार से बताते हुए उनसे लाभ लेने का अनुरोध किया। कार्यक्रम का संचालन योजना प्रभारी ज्योति कुमार सिंह व संयोजन डॉ राणा पियूष ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ एन के सिंह ने किया। कार्यक्रम में किसानों के अतिरिक्त सुनील कुमार मनीष कुमार पंकज तिवारी एवं अन्य कर्मचारी गण उपस्थित थे।

आशीष मोदनवाल की रिपोर्ट

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