
चकिया प्रशासन की बड़ी कामयाबी: ददरा गांव का सालों पुराना ‘रास्ता विवाद’ खत्म, 50 विश्वकर्मा परिवारों के चेहरे खिले
चकिया (चंदौली)।
तहसील चकिया के अंतर्गत आने वाले ददरा गांव में लंबे समय से चला आ रहा एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल जमीनी विवाद आखिरकार शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। उप जिलाधिकारी (SDM) और तहसीलदार चकिया की सूझबूझ और त्वरित पहल से गांव के करीब 50 विश्वकर्मा परिवारों को उनका हक मिल गया है, जिससे उनके आने-जाने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या था पूरा मामला?
ददरा गांव में एक मुख्य रास्ते को लेकर विश्वकर्मा पक्ष (प्रधान गुट) और जायसवाल, ब्राह्मण व अन्य पक्षों के बीच लंबे समय से गंभीर गतिरोध बना हुआ था। मामला “हाईली डिस्प्यूटेड” (अत्यंत विवादित) श्रेणी में था, जिसके कारण गांव में कई बार तनाव की स्थिति पैदा हो जाती थी। रास्ते के अभाव में लगभग 50 विश्वकर्मा परिवारों को दैनिक आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
प्रशासन ने मौके पर कराया समझौता
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी और तहसीलदार चकिया ने खुद कमान संभाली। प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल और राजस्व कर्मियों के साथ मौके पर पहुंची। दोनों पक्षों के मुख्य लोगों को आमने-सामने बैठाकर कानून और आपसी सौहार्द का हवाला देते हुए बातचीत शुरू की गई।
बड़ी बात: प्रशासन की निष्पक्ष और सख्त पैरवी के आगे दोनों पक्ष झुकने को तैयार हुए। घंटों चली मैराथन वार्ता के बाद, दोनों पक्षों की मौजूदगी में आपसी सहमति से जमीन की पैमाइश कराई गई और रास्ते का विवाद हमेशा-हमेशा के लिए सुलझा लिया गया।
सौहार्द की मिसाल
विवाद सुलझने के बाद किसी भी तरफ से कोई विरोध देखने को नहीं मिला। दोनों पक्षों ने शांतिपूर्ण तरीके से फैसले को स्वीकार किया। रास्ता खुलते ही पीड़ित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने सूझबूझ से काम लेने और बिना किसी टकराव के न्याय दिलाने के लिए उप जिलाधिकारी, तहसीलदार और चकिया प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।
यह कार्रवाई क्षेत्र में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक नेतृत्व की एक बेहतरीन मिसाल बनकर उभरी है।
चकिया SDM और तहसीलदार का बड़ा एक्शन: ददरा गांव में दशकों पुराना रास्ता विवाद सुलझा, 50 परिवारों को मिली बड़ी राहत!
ददरा गांव में थमा तनाव: प्रधान और जायसवाल-ब्राह्मण पक्ष के बीच प्रशासन ने कराया ऐतिहासिक समझौता।





