Friday, August 21, 2026
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“ज़मीन नहीं देंगे, अत्याचार नहीं सहेंगे”: यूवाओं ने बुलंद की हक़ की आवाज़, पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ फूटा गुस्सा

“ज़मीन नहीं देंगे, अत्याचार नहीं सहेंगे”: यूवाओं ने बुलंद की हक़ की आवाज़, पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ फूटा गुस्सा

 

किसानों पर पुलिसिया उत्पीड़न बंद करने की यूवाओं का सरकार से मांग

 

*पुस्तैनी जमीनों पर किसानों के मालिकाना हक को सुरक्षित रखा जाए समाज सेवी सुबेदार यादव*

 

 

वाराणसी – अपनी पुश्तैनी ज़मीन और अधिकारों को बचाने के लिए यूवाओं का आक्रोश प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दो टूक शब्दों में कह दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी ज़मीन से पीछे नहीं हटेंगे। यूवाओं ने शासन-प्रशासन पर डराने, धमकाने और पुलिस बल का दुरुपयोग कर आवाज़ दबाने का गंभीर आरोप लगाया है।”पूर्वजों की ज़मीन खो दी, तो कहाँ जाएँगे?

समाज सेवी सुबेदार यादव किसानों की आँखों में अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता प्रगट करते हुए भावुक शब्दों में कहा:

“हम सब किसान हैं। यह ज़मीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, हमारे पूर्वजों की विरासत है और हमारे जीने का एकमात्र सहारा है। अगर सरकार हमसे हमारी ज़मीन छीन लेगी, तो हम कहाँ रहेंगे? क्या खाएँगे और कैसे जीएँगे? हमारे पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा है।

यूवाओं का आरोप है कि उनके शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए प्रशासन द्वारा ‘पुलिसिया उत्पीड़न’ का सहारा लिया जा रहा है। किसानों को डराया-धमकाया जा रहा है और उन पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।यूवाओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए निम्नलिखित मुख्य माँगें रखी हैं: किसानों पर हो रहे हर तरह के पुलिसिया दमन और उत्पीड़न को तत्काल बंद किया जाए।डराने-धमकाने के बजाय सरकार किसानों के अधिकारों का सम्मान करते हुए उनसे सीधे बात करे।पुश्तैनी ज़मीनों पर किसानों के मालिकाना हक को सुरक्षित रखा जाए।

यूवाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस दमनकारी नीति के आगे घुटने नहीं टेकेंगे। यदि सरकार ने उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया और किसानों का उत्पीड़न बंद नहीं किया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

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