Friday, August 21, 2026

पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम सिंह केंद्रीय विद्यालय चकिया की VMC समिति में सदस्य मनोनीत, शिक्षा और प्रकृति के संगम से गढ़ा जाएगा बच्चों का भविष्य

 

पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम सिंह केंद्रीय विद्यालय चकिया की VMC समिति में सदस्य मनोनीत, शिक्षा और प्रकृति के संगम से गढ़ा जाएगा बच्चों का भविष्य

चकिया / चंदौली।

जनपद के शिक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र के लिए एक बेहद गौरवपूर्ण और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। केंद्रीय विद्यालय, जीसी सीआरपीएफ चकिया की विद्यालय प्रबंधन समिति (VMC) में प्रख्यात पर्यावरणविद्, समाजसेवी एवं ‘वृक्ष बंधु’ के नाम से विख्यात डॉ. परशुराम सिंह को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। उनकी इस नियुक्ति से विद्यालय में शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण चेतना और सामाजिक मूल्यों के समन्वय को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अनुभव का मिलेगा सीधा लाभ

डॉ. परशुराम सिंह लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनके द्वारा चलाए गए विभिन्न जन-जागरण अभियानों ने अब तक हजारों लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया है। ऐसे में उनकी विशेषज्ञता और समृद्ध अनुभव का सीधा लाभ अब केंद्रीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं को प्राप्त होगा।

आज का बालक ही कल का राष्ट्र निर्माता”

अपनी इस नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. परशुराम सिंह ने कहा:

“विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। यदि बचपन से ही छात्रों में नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जाए, तो वे भविष्य में एक आदर्श नागरिक के रूप में समाज और राष्ट्र का नेतृत्व कर सकते हैं।”

उन्होंने प्रसिद्ध अंग्रेजी उक्ति “Child is the Father of Man” का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का बालक ही कल का राष्ट्र निर्माता है। इसलिए विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना समय की मांग है, जहाँ छात्र केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति भी सजग बनें।

तकनीक के साथ प्रकृति का समन्वय जरूरी

डॉ. सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के आधुनिक युग में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा जितनी आवश्यक है, उतना ही जरूरी बच्चों को प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए जो छात्रों को वृक्षों, जल संरक्षण, जैव विविधता तथा प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करें। भारतीय संस्कृति भी सदैव प्रकृति पूजन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती रही है।

विद्यालय को बनाया जाएगा ‘हरित और संस्कारित’ मॉडल

विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से डॉ. परशुराम सिंह विद्यालय में निम्नलिखित गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेंगे:

पर्यावरण आधारित व्यावहारिक गतिविधियाँ और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान।

स्वच्छता कार्यक्रम और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता।

नैतिक शिक्षा एवं सांस्कृतिक आयोजनों का विस्तार।

उनका मुख्य उद्देश्य विद्यालय परिसर को केवल एक अध्ययन केंद्र न बनाकर, बल्कि एक हरित, संस्कारित और प्रेरणादायी शैक्षिक वातावरण का आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना है।

समिति को मिलेगी नई गति

बता दें कि विद्यालय प्रशासन तथा जीसी सीआरपीएफ चकिया के डीआईजी श्री राकेश कुमार सिंह एवं कमांडेंट श्री प्रद्युम्न कुमार सिंह के कुशल मार्गदर्शन में गठित विद्यालय प्रबंधन समिति शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस समिति में डॉ. परशुराम सिंह जैसे अनुभवी और समाजहितैषी व्यक्तित्व के शामिल होने से विद्यालय की विकास योजनाओं को एक नई गति और मजबूती मिलेगी।

निष्कर्ष:

शिक्षा और पर्यावरण का यह अनूठा संगम निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देगा। केंद्रीय विद्यालय, जीसी सीआरपीएफ चकिया की यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण साबित होगी, जहाँ ज्ञान, संस्कार और प्रकृति संरक्षण एक साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करेंगे।

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