आशीष मोदनवाल पत्रकार
रामनगर में आवारा पशुओं का आतंक: सड़क पर कब्जा, हादसे का डर, प्रशासन बेखबर?
रामनगर की सड़क पर रात में बैठे आवारा पशु और उनके कारण बाधित यातायात
रामनगर में रात के समय मुख्य मार्ग पर बैठे आवारा पशु यातायात को बाधित करते हुए।
रामनगर की सड़कों पर रात होते ही आवारा पशुओं का कब्जा जिम्मेदार बेखबर क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है प्रशासन
वाराणसी: ऐतिहासिक नगर रामनगर में रात्रि के समय आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या अब आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। रामनगर किले के समीप भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा के पास मुख्य मार्ग पर रात होते ही बड़ी संख्या में आवारा पशु सड़क पर बैठ जाते हैं। इसके कारण यातायात प्रभावित होता है और कई बार वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या पिछले काफी समय से बनी हुई है लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। यह केवल यातायात व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि जन सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।
मुख्य मार्ग पर हर रात प्रभावित होता है आवागमन
रामनगर से सामनेघाट पुल के माध्यम से प्रतिदिन हजारों छोटे और बड़े वाहन वाराणसी और रामनगर के बीच आवागमन करते हैं। यही मार्ग बीएचयू ट्रॉमा सेंटर और शहर के अन्य प्रमुख अस्पतालों तक पहुंचने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। देर रात गंभीर मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस भी इसी सड़क का उपयोग करती हैं। ऐसे में यदि सड़क पर बैठे आवारा पशुओं के कारण यातायात बाधित होता है तो मरीजों तक समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचने में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस मार्ग को हर समय सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
पर्यटन और शहर की छवि पर भी पड़ रहा प्रभाव
जिस स्थान पर यह समस्या सबसे अधिक दिखाई देती है वहां से कुछ ही दूरी पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का पैतृक आवास स्थित है जिसे संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है। यहां प्रतिदिन देश और विदेश से आने वाले पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में मुख्य सड़क पर बड़ी संख्या में आवारा पशुओं की मौजूदगी और यातायात अव्यवस्था शहर की छवि को भी प्रभावित करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकसित और स्वच्छ शहर की परिकल्पना तभी पूरी होगी जब प्रमुख मार्गों पर यातायात सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगा।
स्थानीय लोगों ने रात्रिकालीन अभियान चलाने की मांग उठाई
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए समय समय पर अभियान चलाए जाने के दावे किए जाते हैं लेकिन रात्रि के समय स्थिति पहले जैसी ही बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग के अधिकारी रात के समय मौके पर निरीक्षण करें तो उन्हें वास्तविक स्थिति का पता चल सकता है। नागरिकों का यह भी कहना है कि दिन के बजाय रात्रिकालीन अभियान चलाने से इस समस्या के समाधान में अधिक प्रभावी परिणाम मिल सकते हैं।
दुर्घटना की आशंका बनी रहती है
राहगीरों के अनुसार बाइक सवार साइकिल चालक और पैदल चलने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार अचानक सड़क पर बैठे या इधर उधर घूमते पशुओं के कारण वाहन चालकों को तेज ब्रेक लगाना पड़ता है जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि कई चालक गिरने से बाल बाल बचे हैं। हालांकि इस संबंध में किसी विशेष दुर्घटना की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन लगातार बनी हुई स्थिति लोगों की चिंता बढ़ा रही है।







