Friday, August 21, 2026
No menu items!
No menu items!

लोकतंत्र में प्रतिभावान नेताओं को डुबाता जातिगत राजनीति काली शंकर उपाध्याय की कलम से.

सर्वप्रथम मैं उन लोगों को धन्यवाद कहना चाहता हूं जो लोग मेरी लेखनी को पढ़ते हैं, और मुझे अपना प्यार  हमे देते है ,आज का विषय यह है कि जातिगत राजनीति से प्रतिभावान नेताओं का किस तरह से हनन हो रहा है, और प्रतिभावान नेताओं का भविष्य डूब रहा है जातिगत राजनीति आम जनमानस ही नहीं देश के लिए  भी बहुत ज्यादा खतरनाक होता है , क्योंकि जो योग्य व्यक्ति है उसकी योग्यता के अनुसार उसको उसका पद प्रतिष्ठा नहीं मिलता है और जो अयोग्य व्यक्ति है उसे जातिगत राजनीति की वजह से राजनीति में शिखर पर बैठाया जाता है , जातिगत राजनीति से भारत की एकता और अखंडता में भी दरार आता है जिससे एक जाति के लोग दूसरे जाति को हीन भावना से देखते हैं,आइए जानते हैं जातिगत राजनीति के कुछ कमियां और उसके नुकसान. 

जातिगत राजनीति से बंधुत्व एवं एकता की भावना को हानि पहुंचती है अपने-अपने जाति हितों के संघर्ष के कारण वैमनस्यता पैदा होती है।

समाज के वातावरण में अमन ,चैन एवं शांति की जगह संघर्ष एवं अशांति पैदा होती है। जातीय केवल अपने हितों के लिए संघर्ष करती है।

जाति के आधार पर मतदान करने से योग्य व्यक्ति चुनाव हार जाते हैं। जीतने वाला व्यक्ति भी पूरे समाज के प्रति दायित्वबोध न समझ कर जातीय वफादारी पर ध्यान देता है यह देश एवं समाज दोनों के लिए घातक है।

जातिवाद भावना के कारण नागरिकों की श्रद्धा एवं भक्ति भी बढ़ जाती है लोग राष्ट्रीय हितों के बजाय जाती हितों को प्राथमिकता देने लगते हैं।

जातिवाद के कारण से राजनीतिक दलों का निर्माण भी जाति के आधार पर होने लगता है।

जातिवादी सोच रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती है जिसमें वैज्ञानिक एवं प्रगतिशील दृष्टिकोण का विकास नहीं हो पाता।

अल्पसंख्यक जातीय समुदाय के लोगों में असुरक्षा की भावना का विकास होता है।

जातिवाद लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध होता है यह स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे लोकतंत्रीय मुल्यों को नुकसान पहुंचाता है.

escort bayan sakarya escort bayan eskişehir