सारनाथ (वाराणसी)।
सारनाथ थाना क्षेत्र के मविया स्थित वर्षों पुराने सार्वजनिक पोखरे को जबरन पाटने और कब्जा करने का मामला सामने आया है। खुद को नगर निगम का अधिकारी बताने वाले एक व्यक्ति की इस हरकत से नाराज स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया और धरने पर बैठ गए। पुलिस के हस्तक्षेप और कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।
फर्जी अधिकारी का दावा और नेताओं का विरोध
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘मेहता जी’ नामक व्यक्ति खुद को नगर निगम का अधिकारी बताकर मविया पोखरे को पाटने का काम शुरू करवा रहा था। इसकी सूचना मिलते ही स्थानीय पार्षद सुनील कुमार, अभय पांडेय, मुलायम यादव और बीजेपी युवा नेता सुनील कुमार मौके पर पहुंचे और काम रुकवा दिया।
जब नेताओं ने उससे पोखरा पाटने के आधिकारिक आदेश की मांग की, तो वह उदयलाल मौर्य का हवाला देते हुए जबरदस्ती कब्जा करने की बात करने लगा।
“यह पोखरा वर्षों पुराना और सार्वजनिक संपत्ति है। पूर्व चिराईगांव विधायक ने भी इसे आम जनता के लिए छोड़ा था ताकि आसपास के श्रद्धालु यहाँ छठ पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकें। इस पर किसी को अवैध कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।”
— सुनील कुमार (स्थानीय पार्षद)
जन-आक्रोश देख भागा मेहता जी, चक्काजाम की बनी स्थिति
घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय महिला-पुरुष पोखरे पर एकत्र होने लगे। लोगों की भारी भीड़ और बढ़ता विरोध देख तथाकथित अधिकारी मेहता जी चुपके से मौके से फरार हो गया। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीण पोखरे के पास ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए चक्काजाम की तैयारी करने लगे।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, दिलाया भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए आशापुरा चौकी इंचार्ज दीक्षा पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने उग्र जनता को शांत कराया और जांच का आश्वासन दिया।
चौकी इंचार्ज दीक्षा पांडेय ने स्पष्ट किया:
“शासन या प्रशासन की तरफ से पोखरा पाटने का ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।”
“यहाँ किसी भी प्रकार का अवैध कार्य नहीं होने दिया जाएगा।”
“पुलिस जनता के साथ है, कृपया शांति बनाए रखें।”
चौकी इंचार्ज के ठोस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया और यातायात सुचारू हो सका। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।






