Thursday, August 20, 2026

उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों की जांच व्यवस्था में बड़ा बदलाव

*उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों की जांच व्यवस्था में बड़ा बदलाव*

अब राजस्व मामलों की जांच लेखपाल नहीं, बल्कि नायब तहसीलदार करेंगे।
शिकायतकर्ता अक्सर लेखपाल की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं।

कई बार जांच में आंशिकता की भी शिकायत होती थी, जिससे विवाद और बढ़ते थे।

नए तंत्र के ज़रिए कम से कम दो स्तरों पर जांच होकर भेदभाव की संभावना कम होगी, जिससे जन-संतोष बढ़ेगा।

🔍 पृष्ठभूमि:

मुख्यमंत्री कार्यालय को जनता दर्शन में शिकायतें मिल रही थीं कि लेखपालों की रिपोर्ट निष्पक्ष या पर्याप्त नहीं होती। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय लिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत:

लेखपाल की रिपोर्ट को अब अंतिम नहीं माना जाएगा।

नायब तहसीलदार से नीचे कोई अधिकारी राजस्व मामलों की जांच नहीं करेगा।

शिकायतकर्ता को सुनने के बाद ही नायब तहसीलदार रिपोर्ट देंगे।

अंतिम निर्णय उप जिलाधिकारी (SDM) स्तर पर लिया जाएगा।

🏛️ प्रशासन की मंशा:

जनता की शिकायतों का निष्पक्ष व पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना।

प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना।

“अब किसी की रिपोर्ट से नहीं, सुनवाई से होगा न्याय” – इस सिद्धांत को लागू करना।

उम्मीद जताई जा रही है कि इससे राजस्व विवादों का तेज़ और न्यायपूर्ण समाधान संभव होगा, और प्रशासन पर जनता का भरोसा मजबूत होगा।

जनता में विश्वास बढ़ेगा।

भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी।

राजस्व विवादों का सुनियोजित व न्यायसंगत समाधान मिलेगा।

*चन्दौली से ~ तारकेश्वर पाण्डेय की रिपोर्ट*

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