Thursday, August 20, 2026

कैद मे है वो एक जैसे, बुलबुल, मन है उसका भी चुलबुल

कैद मे है वो एक जैसे, बुलबुल, मन है उसका भी चुलबुल!
हँसना ,मुकुराना,बतियाना, तो चाहती है ,मगर सज़ा है! कि ना अश्क दिखे ना दर्द,
बस तन्हा बैठ यही सोचती! ,कि दर्द सहती रहे,या, मौत, का आलिंगन कर ले!

“पारुल राज”

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