प्रेस विज्ञप्ति
गांव-गांव में जनभागीदारी से मजबूत होगा लोकतंत्र: पंचायती राज को साकार करने का संकल्प
रोहनिया/बच्छाव, वाराणसी | 24 अप्रैल 2026
पंचायती राज दिवस के अवसर पर सृजन सेवा ट्रस्ट वाराणसी एवं महिला संगठन के संयुक्त तत्वावधान में काशी विद्यापीठ ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुरुहुवा, बच्छाव, मुड़ादेव एवं टिकरी में जागरूकता गोष्ठियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों को पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों, ग्राम सभा की भूमिका तथा पंचायत प्रतिनिधियों के दायित्वों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पंचायती राज व्यवस्था को भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि यह प्रणाली “जनता का शासन, जनता के द्वारा, जनता के लिए” की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार करती है। इसके माध्यम से प्रत्येक वयस्क नागरिक न केवल अपने प्रतिनिधियों का चयन करता है, बल्कि विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी भी निभाता है।
वक्ताओं ने ग्राम प्रधान, ग्राम सभा सदस्यों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिकाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही पंचायत की विभिन्न समितियों के दायित्वों को स्पष्ट करते हुए बताया गया कि सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का प्रभावी प्रबंधन पंचायत के माध्यम से ही संभव है। योजनाओं का निर्माण गांव की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सामूहिक सहमति से किया जाता है, जिससे विकास अधिक सार्थक और टिकाऊ बनता है।
गोष्ठी में सामाजिक न्याय के महत्व पर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्गों को आरक्षण के माध्यम से सशक्त प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाता है, जो समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।
इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि पंचायत की सफलता पांच मूलभूत तत्वों—संवाद, सहमति, सहयोग, सहभाग और सहकार—पर आधारित है। इन सिद्धांतों को अपनाकर ही एक सशक्त, उत्तरदायी और प्रभावी पंचायत व्यवस्था का निर्माण संभव है।
गोष्ठी में शीला, रेखा, ममता, राधा, सुदामा, अनिता, सीमा, राधिका, उषा, सुषमा सहित अनेक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं सृजन सेवा ट्रस्ट की ओर से बिंदु, प्रियंका, नेहा एवं राजेश सिंह की विशेष उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ किया गया कि ग्रामीण स्तर पर जागरूकता और जनसहभागिता को बढ़ाकर पंचायती राज अधिनियम के उद्देश्यों को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा तथा एक सशक्त और आत्मनिर्भर पंचायत व्यवस्था का निर्माण किया जाएगा।






