
चन्दौली: दान की भूमि पर वरासत दर्ज करना गैर-कानूनी, राजस्व निरीक्षक के एक दर्जन आदेश निरस्त
चकिया (चन्दौली)। तहसील चकिया के अंतर्गत मौजा कटवामाफी (परगना केरामगरौर) में दान की गई भूमि पर गलत तरीके से वरासत दर्ज करने के एक बड़े मामले में राजस्व विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। सक्षम प्राधिकारी ने स्पष्ट किया है कि दानशुदा भूमि पर वरासत के आधार पर नाम दर्ज किया जाना पूरी तरह से विधि-विरुद्ध (गैर-कानूनी) है। ऐसी भूमि पर केवल दान पत्र की शर्तों के अनुसार प्रबंधन का कार्य ही किया जा सकता है।
वर्षों पुराने वरासत आदेश हुए रद्द
मामले की सुनवाई के बाद आराजी नंबर 62, 75 और 77 पर विभिन्न वर्षों में राजस्व निरीक्षकों (कानूनगो) द्वारा पारित किए गए करीब एक दर्जन आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
निरस्त किए गए आदेशों में हाल के वर्षों (2020 से 2025 तक) के ऑनलाइन आवेदनों के साथ-साथ वर्ष 1989, 1991, 2002, 2004 और 2005 में ‘प० क० 11क’ के तहत जारी किए गए पुराने वरासत आदेश भी शामिल हैं।
सभी खातेदारों के नाम कटे, मंदिरों के नाम भूमि बहाल
इस ऐतिहासिक फैसले के तहत विवादित आराजी नंबर 62, 75 और 77 से उन सभी व्यक्तियों (खातेदारों) के नाम खारिज कर दिए गए हैं, जिन्होंने वरासत के आधार पर अपना नाम दर्ज करा लिया था। अब यह भूमि पूरी तरह से ‘मंदिर श्री रामचन्द्र जी’ और ‘मंदिर श्री विष्णु जी’ के नाम पर यथावत बहाल रहेगी।
राजस्व न्यायालय ने आदेश पर अमलदरामद (अभिलेखों में प्रविष्टि) करने के बाद पत्रावली को दाखिल दफ्तर (Record Room) करने का निर्देश जारी कर दिया है। इस फैसले से भू-माफियाओं और दान की जमीनों पर गलत तरीके से मालिकाना हक जताने वालों को एक कड़ा संदेश गया है।





