Thursday, August 20, 2026

नज़र को जाम लबों को गुलाब लिखूँगी, तुम्हारे नाम ग़ज़ल की किताब लिखूँगी। डॉ. नशीमा निशा

नज़र को जाम लबों को गुलाब लिखूँगी, तुम्हारे नाम ग़ज़ल की किताब लिखूँगी।

तुम्हारी हूँ मैं मगर तुमसे मिल नहीं सकती, तुम्हारे ख़त का यही मैं जवाब लिखूँगी।

दयारे शहर ए मोहब्बत में रोज़ मिलते हैं, मैं डायरी में वो अहद-ए-शबाब लिखूँगी।

ख़्याल बनके तुम आते हो मेरे ख्वाबों में, तुम्हारे ख़्वाब को मैं अपना ख़्वाब लिखूँगी।

मैं शयरा हूँ अदब की अदब के लहजे में, ‘निशा’ मैं अहले जुबा का जवाब लिखूँगी।

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