Thursday, August 20, 2026

भीगी पलकें लुप्त हो चुकी अब उनकी आवाज, अपने धुन के माहिर थे कवि चपाचप 

भीगी पलकें लुप्त हो चुकी अब उनकी आवाज, अपने धुन के माहिर थे कवि चपाचप

बनारसी जी नहीं हैं हम सबके बीच में आज-

वाराणसी महानगर के लहुराबीर आजाद पार्क में अखिल भारतीय लेखक कवि कलाकार परिषद् के संस्थापक कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक के प्रमुख संयोजन/ संचालन में, जनकल्याण परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष गंगा सहाय पाण्डेय के प्रमुख संरक्षण में सर्वदलीय गौ रक्षा मंच के प्रदेश अध्यक्ष श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश – मुख्य अतिथि के गरिमामयी उपस्थिति में दी बनारस बार एसोसिएशन वाराणसी के नवनियुक्त वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठी एडवोकेट का सर्वदलीय नागरिक अभिनन्दन शायरे आज़म, कवि चिंतित बनारसी के अध्यक्षता में विशिष्ट अतिथि डॉ.पुष्पेन्द्र अस्थाना पुष्प, कवि अशोक श्रीवास्तव भुलक्कड़ बनारसी, शैलेन्द्र अंबष्ट के गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

मुख्य अतिथि श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश ने कहा कि चपाचप जी हरफनमौला अक्खड़ बनारसी रचनाकार और सरल हृदय मृदुभाषी, स्पष्टवादी थे। प्रमुख संयोजक गंगा सहाय पाण्डेय ने कहा कि चपाचप के रग-रग में साहित्य का सब रस था जो पराये को भी अपना बना लेते थे।मंच के सरताज थे।

मुख्य संयोजक कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक ने कहा कि चपाचप जी हिन्दी साहित्य के मंचों के धुरंधर रचनाकारों में अपना एक अलग पहचान रखते थे – भींगी पलकें लुप्त हो चुकी अब उनकी आवाज, अपने धुन के माहिर थे चपाचप जी,हम सबके बीच नहीं हैं आज फिर भी हर दिलों में छाई रहती है उनकी आवाज।

चपाचप स्मृति सम्मान मंचीय एवं आनलाईन 108 लोगों को दिया गया।

उक्त आयोजन में कवि अशोक श्रीवास्तव भुलक्कड़ बनारसी, शैलेन्द्र अंबष्ट, इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक, चिंतित बनारसी, नाट्य रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता, डॉ. पुष्पेन्द्र अस्थाना पुष्प, डॉ. केपी. प्रकाश लावारिश,अनुज दूबे, चिन्मय चटर्जी,गुरूनारायण सेठ सहित अनेकों रचनाकारों ने काव्य पाठ किया और स्मृति सम्मान प्राप्त किया।

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