
वाराणसी: जनपद के चर्चित मनीष सिंह हत्याकांड को लेकर आक्रोश की ज्वाला शांत होने का नाम नहीं ले रही है। “प्राण जाए पर बचन न जाए” के संकल्प के साथ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (युवा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर अवनीश सिंह के नेतृत्व में युवाओं ने प्रशासन की भारी घेराबंदी को चुनौती देते हुए न्याय की आवाज बुलंद की है।

परिजन असंतुष्ट, 10 किलोमीटर का इलाका ‘लॉक’
प्रस्तावित न्याय जुलूस को रोकने के लिए वाराणसी प्रशासन ने बाबतपुर-बड़ागांव मार्ग को पूरी तरह सील कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 3 IPS और 8 PPS अधिकारियों सहित 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में अघोषित ‘लॉकडाउन’ जैसी स्थिति दिखी। पुलिस ने जुलूस को रोकने के लिए कई पदाधिकारियों को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया, बावजूद इसके कुंवर अवनीश सिंह के नेतृत्व में युवाओं ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।

अपराधियों के अवैध साम्राज्यों पर बुलडोजर की तैयारी
प्रशासन अब आरोपियों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। तहसील प्रशासन की जांच में पांच मुख्य आरोपियों—मनीष, आशीष, दीपक, हरिश्चंद्र और अजय राजभर के मकान सरकारी जमीन (नवीन परती और घूर गड्ढे) पर अवैध रूप से निर्मित पाए गए हैं। एसडीएम पिंडरा, प्रतिभा मिश्रा के अनुसार, बेदखली का नोटिस जारी कर दिया गया है और जल्द ही इन अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की कार्रवाई और शेष चुनौतियां
एडीसीपी गोमती जोन नृपेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक इस मामले में 15 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें अपराधियों को शरण देने वाले 4 नए आरोपी भी शामिल हैं। हालांकि, मनीष की पत्नी अंकिता और परिजन पुलिस की मुठभेड़ की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्रीय विधायक और पुलिस ने जो ‘कड़ी सजा’ का वादा किया था, वह अभी तक अधूरा है।
वर्तमान में 50-50 हजार के तीन इनामी अपराधी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में क्राइम ब्रांच और फूलपुर पुलिस लगातार दबिश दे रही है। वाराणसी का घमहापुर इलाका इस समय प्रशासनिक सख्ती और जन-आक्रोश के बीच एक संवेदनशील केंद्र बना हुआ है।







