वाराणसी (चिरईगांव)। चिरईगांव क्षेत्र के संदहा बालू मंडी में बीते दिनों प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में 68 वाहनों के चालान के बाद हड़कंप तो मचा, लेकिन अवैध खनन का यह धंधा पूरी तरह बंद नहीं हो सका है। दिन के उजाले में प्रशासनिक कार्रवाई के डर से भले ही सन्नाटा पसरा रहता हो, लेकिन रात के अंधेरे में बालू और बालदुश मिट्टी का अवैध खनन आज भी धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल के असली किरदार यानी ‘ठेकेदार’ अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
दिन में सन्नाटा, रात में सक्रिय होता है सिंडिकेट
प्रशासन ने पिछले दिनों कार्रवाई करते हुए 22 ट्रक और 46 ट्रैक्टर समेत 68 वाहनों को सीज किया था और जमीन मालिक को VNS 152 की नोटिस भी थमाई थी। लेकिन इस बड़ी कार्रवाई का असर केवल छोटे वाहन चालकों पर ही देखने को मिला।
क्षेत्र से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, रात होते ही प्रतिबंधित इलाकों और घाटों के आस-पास जेसीबी और ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है। बालदुश मिट्टी और बालू का अवैध परिवहन कर पर्यावरण और सरकारी राजस्व को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है सुलगते सवाल: मुख्य मोहरों पर मेहरबानी क्यों?
स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि आखिर इस अवैध कार्य को संचालित करने वाले मुख्य ठेकेदारों पर पुलिस का शिकंजा अभी तक क्यों नहीं कस पाया है? छोटे ड्राइवरों और गाड़ियों का चालान कर प्रशासन अपनी पीठ तो थपथपा रहा है, लेकिन खनन माफियाओं के सरगना (ठेकेदार) आज भी बेखौफ होकर रात के अंधेरे में अपना साम्राज्य चला रहे हैं।
‘जल्द नपेंगे ठेकेदार’ — खनन अधिकारी
इस पूरे मामले और रात के अंधेरे में हो रहे खेल को लेकर जब जवाब मांगा गया, तो विभागीय अधिकारियों ने सख्त तेवर दिखाए हैं।
खनन अधिकारी प्रशांत शर्मा ने बताया:
“मामला पूरी तरह से हमारे संज्ञान में है। रात के अंधेरे में चोरी-छिपे खनन करने वालों और इस अवैध कार्य को सह देने वाले ठेकेदारों को बख्शा नहीं जाएगा। हम ऐसे सभी ठेकेदारों को चिन्हित कर रहे हैं और जल्द ही इन पर पुलिसिया शिकंजा कसते हुए बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
अब देखना यह होगा कि खनन अधिकारी और स्थानीय पुलिस का यह दावा कितनी जल्दी जमीन पर उतरता है, या फिर रात के अंधेरे में चांदी काटने वाले ये ठेकेदार इसी तरह कानून को ठेंगा दिखाते रहेंगे








