हर तरफ धुँआ धुआं और तुम धर्म की बात करते हो : काली शंकर उपाध्याय की कलम से
वाराणसी धर्म और संस्कृति की नगरी काशी बाबा विश्वनाथ का धाम और मां गंगा की पावन तट के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है लेकिन इस समय युवा पीढ़ी नशे की लत से काशी की अस्मिता पर सवाल उठा रहे है वाराणसी का अस्सी क्षेत्र, जो अपनी सुबह-ए-बनारस, घाटों की जीवंतता और शांत माहौल के लिए दुनिया भर में मशहूर है, इन दिनों कुछ युवाओं के नशे के शौक के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है।
अस्सी और उसके आस-पास के कुछ कैफे युवाओं के लिए नशे का अड्डा बनते जा रहे हैं। घर से युवा पीढ़ी मां बाप की गाड़ी कमाई नशे में धकेल रही है और नशे का शिकार होती जा रही है अभिभावक को इतना समय ही नहीं कि हमारा बच्चा कहां जा रहा है और कितना समय कहां दे रहा है क्या देश की भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं है युवा ही देश के भविष्य होते हैं और युवा इस नशे की लत से अगर आदि हो जाएंगे तो भारत का भविष्य क्या होगा ?
कैफे के बंद कमरों और केबिनों में खुलेआम गांजे का धुआं उड़ाया जा रहा है।
ओसी (O.C.) और गोगो पेपर का क्रेज, उड़ रहे हैं छल्ले
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कॉलेज जाने वाले युवा और बाहरी छात्र इन कैफे में घंटों वक्त बिताते हैं। यहां ‘गोगो’ (Gogo) और ‘ओसी’ (O.C.) जैसे रोलिंग पेपर्स में गांजा भरकर धुआं उड़ाया जा रहा है। धुएं के छल्ले उड़ाते युवा न केवल अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक छवि को भी धूमिल कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों में
इस ट्रेंड से अस्सी क्षेत्र के स्थानीय निवासी और संभ्रांत नागरिक काफी चिंतित और आक्रोशित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है:
संस्कृति पर प्रहार: अस्सी घाट और आस-पास का क्षेत्र पढ़ाई, अध्यात्म और विमर्श का केंद्र रहा है, लेकिन अब यह नशे की चपेट में आ रहा है।
असुरक्षित माहौल कैफे में बढ़ती इस प्रवृत्ति के कारण देर शाम के बाद परिवार के साथ निकलना असहज हो जाता है।
प्रशासन से मांग: स्थानीय निवासियों ने पुलिस और आबकारी विभाग से मांग की है कि ऐसे कैफे को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल अभी खड़ा होता है कि क्या चंद्र रूपों के लिए कैसे मलिक इन युवाओं को नशे का आदी बना रहे हैं या इस भौतिक युग में युवा पीढ़ी खुद खुद रही है.






