Friday, August 21, 2026
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प्राचीन कोट मां भगवती देवी मंदिर पर शारदीय नवरात्र के पहले दिन ही श्रद्धालुओ का उमड़ा जनसैलाब

सिकंदरपुर का प्राचीन नाम सैकड़ों वर्ष पूर्व दाशीपुर था

चंदौली।चकिया दिनांक 22/09/2025 को शारदीय नवरात्र में पहला दिन से ही श्रद्धालुगण बहुत दूर दूर से आकर प्राचीन कोट मां भगवती देवी मंदिर दरबार में माला फूल व नारियल चुनरी प्रसाद चढ़ा कर और धूप दीप जलाकर अपनी अपनी मुरादे पूरी करने की दरबार में मत्था टेक कर सभी लोग मां भगवती देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने आते है। चंदौली जनपद के तहसील चकिया से मात्र 5 किलोमीटर दूर ग्राम सभा सिकन्दरपुर में चन्द्रप्रभा नदी के तट पर स्थित राजा बलवन्त सिंह के किले (आरामगाह ) के उपर स्थापित कोट मां भगवती देवी का मंदिर भी शक्त्ति उपासना की एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित है। जहा त्रान्तिको , तंत्र – मंत्र के ज्ञाता विद्वान ज्ञानी पंडित दोनों शारदीय एवम वासंतिक ( चैत्र ) नवरात्रो के अलावा हमेशा साधनारत रहते है।
मां कोट भवानी की ऐतिहासिकता की गाथा सैकड़ो वर्ष पुरानी है। मां भगवती श्रद्धा व विस्वास की प्रतिमूर्ति है। लोगो का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गयी मुरादे मां अवश्य पूरी करती है। मां के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के सारे कष्ट स्वतः नष्ट हो जाते है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा बलवन्त सिंह काल वर्ष 1752 ई0 में शक्त्ति पीठ मां भगवती देवी की स्थापना नीम के पेड़ वाले चबूतरा पिंडी के रूप में की गई थी। मां की पूजा वर्षो तक की जाती रही। इस कोठी से सिकंदर शाह नामक जागीर राजा बलवन्त सिंह का लगान वसूली इस श्रेत्र का किया करता था। उस समय सिकन्दरपुर का प्राचीन नाम दाशीपुर था। मंदिर के वर्तमान पुजारी / एवं ग्रामीण बताते है कि 1861 ई0 में महाराज साहब बहादुर काशी नरेश ( राजा ईश्वरी प्रसाद सिंह ) द्वारा स्थित आरामगाह ( किला ) प्रांगण में कोट मां भगवती देवी मंदिर का निर्माण कराकर मंदिर के पूजा पाठ राग भोग एवं सर सफाई व मरम्मत व देख भाल कार्य हेतु पुजारी / प्रबंन्धक के रूप में रामरतन पाठक निवासी सिकन्दरपुर ( दाशीपुर ) को नियुक्त करके सुपुर्द कर दिये। बीच- बीच मे महाराजा साहब का आना जाना लगा रहता था। फिर धीरे धीरे कोठी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी।। उसी समय से वर्तमान पुजारी / प्रबंन्धक के पूर्वज रामरतन पाठक के मरणोपरांत ,ब्रम्हा पाठक के बाद अन्तु पाठक के बाद वर्तमान पुजारी / प्रबंन्धक नन्हे पाठक द्वारा सन 1979 ई0 में मंदिर का जीर्णोद्वार जन सहयोग से कराये और उनके मरणोपरांत वर्तमान पुजारी / प्रबंन्धक विनय पाठक ने सन 2000 ई0 में उक्त भूमि आ0 न0 653 रकबा 0,465 हे0 भूमि प्रांगण में दो कमरे मकान पुजारी कक्ष का निर्माण रहने हेतु अपने निजी धन से कराया । सन 2009ई0 में देवी मंदिर का भभ्य जीर्णोद्वार जन सहयोग से विनय पाठक द्वारा 2012 में पूर्ण रूप से निर्मित हुआ व सन 2020ई0 में मंदिर के आगे भभ्य बरामदे व हवन कुण्ड के चबूतरे का निर्माण जन सहयोग से कराया गया । दिनांक 03/06/2022 को रात्रि में मां भगवती देवी जी का कुछ शरारती अराजक तत्वों द्वारा मूर्ति खंडित कर दिया गया था।पुनः मां भगवती देवी जी का नई मूर्ति का स्थापना दिनांक 13/06/2022 को जन सहयोग से कराया गया।मूर्ति की स्थापना पंडित आचार्य कैलाश दुबे जी के नेतृत्व में विधिविधान से सिकंदरपुर गांव के ही पूजा में अनिल रस्तोगी, निरज केशरी, रामसूरत प्रजापति,पन्ना यादव,राजाराम यादव,अपने पत्नी के साथ संकल्पित होकर समलीत हुए। पूजा पाठ का देख रेख राजीव पाठक,संजय पाठक,शिवानंद पटेल,चंद्रमोहन पांडेय, चंद्रजीत यादव,कन्हैयागुप्ता,रमेश विश्वकर्मा,हीरा यादव, राजुगुप्ता, संतोष जायसवाल,विजय केशरी, बंधुदास केशरी, लोलारक यादव,अरुण जायसवाल सहित अन्य लोग व मंदिर के पुजारी/प्रबंधक विनय पाठक के द्वारा संपन्न हुआ।
यहा कोट मां भगवती देवी की शक्त्ति की कई कथाएं मौजूद है।
एक सच्ची घटना जिसका जिक्र आज भी सिकन्दरपुर वासी करते हैं सन 1960ई0 में कुछ बाहरी चोर खजाने में सेंध लगाने की कोशिश किये । गांव के दर्शनिया भुल्लनराम को स्वप्न में मंदिर में चोरों के घुसे होने की जानकारी मिली तो भुल्लनराम ने पहले मंदिर के पुजारी अन्तु पाठक व गांव के नागरिकों को एकत्रित कर चोरो के मंसूबो पर पानी फेर दिया। रात्रि भर मां भगवती देवी जी ने उन चोरो को उसी स्थान पर अंधा बना कर भटकने पर मजबूर कर दिया। एक दूसरी घटना सन 1965ई0 में गांव के कुम्बर माली को मां ने स्वप्न में मंदिर के नीचे खजाने की जानकारी दी मंदिर के पिछले गुप्त दरवाजे से खजाने में रखे चॉदी के सिक्के जेवरात को एक मुठ्ठी उठाने को कहा लेकिन धन देख कर कुम्बर माली के मन मे लालच आ गयी और अधिक उठाने की बात सोचने लगा और उसने अधिक धन उठाने लगा । जिससे मां क्रोधित हो गयी और उसी समय असंख्य भौरे बनकर उसे काटने लगी। कुम्बर माली मात्र एक तलवार लेकर ही बाहर आया ।और घर पहुचने पर अपाहिज हो गया ।एक तीसरी घटना सन 1972ई0 में गांव के ही कुछ शरारती तत्वों ने मंदिर के रास्ते मे शीशे का टुकड़ा रख दिये थे। जिससे नियमित दर्शनार्थी चोटिल हो गये। मां की भीकुटी थोड़ी टेढ़ी हुयी। जिसका नतीजा यह हुआ कि उन शरारती तत्वों के बस्ती में हैजा फैल गया। जिससे कई लोगो की जान जाने की नौबत होने लगी तब मां की पूजा करने व बिनती करने पर बस्ती में शांति हुई। चौथी घटना मंदिर के मुख्य दरवाजे पे गांव के ही कुछ मनबढ़ लोग द्वारा ताला बंद कर दिए जिससे मां भगवती देवी जी का आरती,पूजा, राग, भोग रुक गया।तभी मां के प्रकोप से उस व्यक्ति का 24 घंटे के अंदर दाहिना हाथ में तीन जगह टूट गया था और एक माह के अंदर हि दाहिना पैर भी टूट गया तभी से गांव के आस पास के लोगो में मां के प्रति आस्था और बढ़ गई।वर्तमान समय में गांव के ही लक्ष्मी रस्तोगी व अमित सिंह द्वारा मंदिर के चारो ओर से परिक्रमा करने वाले जगह पे जाली लगवाया गया है। और जिला पंचायत द्वारा टीन सेट भी लग गया है।अभी तत्काल में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सत्यप्रकाश गुप्ता द्वारा मंदिर के हैंड पंप में समरसेबूल लगवाया गया है।आज भी मंदिर के प्रांगड़ का सुंदरीकरण व सामुदायिक शौचालय, विवाह मंडप व विधुतीकरण व रैन बसेरा, चाहदीवारी व बृच्छरोपण की आवश्यकता है।

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