चिरईगांव/वाराणसी : निर्वाचन कार्य में लापरवाही और सरकारी कार्यालय में अनुशासनहीनता का एक गंभीर मामला सामने आया है। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) विजय कृष्ण उपाध्याय ने ग्राम पंचायत छितौनी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बीएलओ (BLO) संयोगिता के विरुद्ध एसडीएम को पत्र लिखकर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि बीएलओ ने अपने भाई और बेटे के साथ मिलकर कार्यालय में गाली-गलौज की और सरकारी कार्य में व्यवधान डाला।
लापरवाही और शिकायतों से शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत छितौनी की भाग संख्या 251 की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संयोगिता को बीएलओ के रूप में सौंपी गई थी। पिछले कुछ समय से ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म भरने की अपनी ड्यूटी का निर्वहन नहीं कर रही हैं और क्षेत्र से अक्सर लापता रहती हैं। इसके अलावा, मतदाताओं के साथ उनके व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई जा रही थी।
इन्हीं शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सीडीपीओ विजय कृष्ण उपाध्याय ने बीएलओ को निर्देश दिया था कि वे शिकायतकर्ताओं से संबंधित फॉर्म कार्यालय में प्रस्तुत करें ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
कार्यालय में हाई-वोल्टेज ड्रामा
सोमवार दोपहर जब बीएलओ संयोगिता कार्यालय पहुंचीं, तो उन्होंने सहयोग करने के बजाय आक्रामक रुख अपना लिया। पत्र के अनुसार, वे अधिकारी से तेज आवाज में बात करने लगीं। जब सीडीपीओ ने उन्हें शालीनता से बात करने और कार्य की स्थिति स्पष्ट करने को कहा, तो वह भड़क गईं।
विवाद तब और बढ़ गया जब बीएलओ ने फोन करके अपने भाई और बेटे को कार्यालय परिसर में बुला लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और शिकायत पत्र के अनुसार, तीनों ने मिलकर कार्यालय के भीतर ही अधिकारी और कर्मचारियों के साथ अभद्रता की। आरोप है कि उन्होंने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। इस दौरान बीएलओ ने संबंधित फॉर्म भी जमा नहीं किए और वहां से चली गईं।
सरकारी कार्य हुआ प्रभावित
इस घटना के बाद कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे महत्वपूर्ण निर्वाचन कार्य बाधित हुआ। एईआरओ विजय कृष्ण उपाध्याय ने इस पूरे घटनाक्रम की लिखित रिपोर्ट उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को सौंप दी है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया है कि बीएलओ और उनके परिजनों का यह कृत्य न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि सरकारी लोक सेवक को उसके कर्तव्य पालन से रोकने का गंभीर अपराध भी है।
> “निर्वाचन जैसा महत्वपूर्ण कार्य संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की मांग करता है। कार्यालय में आकर अभद्रता करना और धमकी देना स्वीकार्य नहीं है। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।” — विजय कृष्ण उपाध्याय, CDPO/AERO
कार्रवाई की तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और सरकारी कार्य में बाधा डालने की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की जा सकती है।






