मंगलवार, 11 अगस्त 2026.विकास खंड चिरईगांव का ग्राम पंचायत कुकुढ़ा इन दिनों शासन-प्रशासन के विकास के दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है। शिवपुर से विधायक व कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह और चिरईगांव ब्लॉक प्रमुख अभिषेक सिंह जैसे ताकतवर जनप्रतिनिधियों का क्षेत्र होने के बावजूद कुकुढ़ा गांव उपेक्षा का शिकार है।
मंगलवार सुबह 11 बजे गांव की चौपाल पर जुटे ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं। 52 वर्षीय रामबहाल यादव ने कहा, “सड़के टूटी हैं और नालियां बज बजा रही हैं। बारिश में बुरा हाल हो जाता है।” वहीं 44 वर्षीय सुभाष विश्वकर्मा ने आक्रोश जताते हुए कहा, “सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। जनप्रतिनिधि केवल चुनाव में ही नजर आते हैं।” 38 वर्षीय सुरेश राम का कहना था कि पांच साल तक सुध न लेने वाले नेता अब चुनावी हलचल बढ़ते ही गांव के चक्कर काट रहे हैं।
दूसरी ओर, ग्राम प्रधान दशरथ कुमार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। जब उनसे विकास कार्यों पर सवाल किया गया तो उनका रटा-रटाया जवाब था— “सरकार से बजट ही नहीं आया, तो मैं क्या करूं?” ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान की यह कार्यशैली केवल बहानेबाज़ी है और जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है।
अब चुनाव नज़दीक आते ही क्षेत्र में ‘माननीय’ लोगों की सक्रियता और बैठकों का दौर अचानक बढ़ गया है। हालांकि, कुकुढ़ा के जागरूक ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इस बार खोखले वादों पर वोट नहीं मिलेगा, बल्कि जनता पिछले पांच सालों का हिसाब मांगेगी।, ग्राम प्रधान दशरथ कुमार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। जब उनसे विकास कार्यों पर सवाल किया गया तो उनका रटा-रटाया जवाब था— “सरकार से बजट ही नहीं आया, तो मैं क्या करूं?” ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान की यह कार्यशैली केवल बहानेबाज़ी है और जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है।
अब चुनाव नज़दीक आते ही क्षेत्र में ‘माननीय’ लोगों की सक्रियता और बैठकों का दौर अचानक बढ़ गया है। हालांकि, कुकुढ़ा के जागरूक ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इस बार खोखले वादों पर वोट नहीं मिलेगा, बल्कि जनता पिछले पांच सालों का हिसाब मांगेगी






