Saturday, October 17, 2026

चंदौली में अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: जापानी बुजुर्गों को ठगने वाले 5 शातिर गिरफ्तार, करोड़ों के फ्रॉड का खुलासा

चंदौली।

उत्तर प्रदेश की चंदौली पुलिस, स्वाट/सर्विलांस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने विदेशियों को निशाना बनाने वाले एक हाईटेक अंतरराष्ट्रीय साइबर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। थाना मुगलसराय क्षेत्र के कैलाशपुरी स्थित एक इमारत में चल रहे अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर पुलिस ने 5 अभियुक्तों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना सहित 3 अन्य नामजद आरोपी फरार हैं। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में कंप्यूटर, लैपटॉप और फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं। साथ ही एक अभियुक्त के दो बैंक खातों में मौजूद लगभग 9 लाख रुपये फ्रीज करा दिए गए हैं।

जापानी भाषा सीखकर बुजुर्गों को बनाते थे निशाना

पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अभियुक्तों ने बिहार के नालंदा और गया में बाकायदा जापानी भाषा सीखी थी। इसके बाद वे इंटरनेट कॉलिंग सॉफ्टवेयर (VoIP) और ZOIPER5 ऐप के जरिए जापान के नागरिकों को कॉल करते थे। फोन स्क्रीन पर जापान का ही कोड (+81) दिखता था, जिससे पीड़ित झांसे में आ जाते थे।

गिरोह का मुख्य निशाना जापान के वे बुजुर्ग होते थे जो तकनीक से कम परिचित थे और जिनके खातों में मोटी रकम जमा थी। शातिर खुद को कंप्यूटर या बैंक का टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर सिस्टम में खराबी का डर दिखाते थे और फर्जी डिजिटल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा जीतते थे।

रिमोट एक्सेस और वेबकैम से खाली करते थे खाते

ठग पीड़ितों को एक जापानी वेबसाइट के माध्यम से ‘LogMeIn Rescue Console’ पर 6-डिजिट का पिन दर्ज करने को कहते थे। पिन डालते ही ठगों को पीड़ितों के कंप्यूटर का पूरा रिमोट एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद ‘वेरिफिकेशन’ के बहाने पीड़ितों का वेबकैम ऑन करवाकर उन्हें कैमरे के सामने बैठा दिया जाता था और उनके इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स हासिल कर खातों से लाखों येन (जापानी करेंसी) ट्रांसफर कर लिए जाते थे।

चीनी कनेक्शन और हवाला का खेल

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के तार चीनी साइबर अपराधियों से भी जुड़े हैं। विदेशी व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए चीनी सदस्य ‘म्यूल बैंक खाते’ उपलब्ध कराते थे, जिनमें ठगी का पैसा भेजा जाता था। इसके बाद हवाला के जरिए जापानी मुद्रा को भारतीय रुपयों में बदलकर कॉल सेंटर का संचालन किया जाता था। अपनी पहचान छुपाने के लिए आरोपियों ने वाराणसी के पते पर कूटरचित पहचान पत्र बनवा रखे थे।

बरामदगी का विवरण

पुलिस टीम ने मौके से साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले निम्नलिखित उपकरण जब्त किए हैं:

कंप्यूटर सेट: 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 19 की-बोर्ड, 18 माउस और 18 हेडफोन

लैपटॉप: 03 (एचपी व डेल)

मोबाइल फोन: 06 स्मार्टफोन (आईफोन, वनप्लस, रेडमी आदि)

नेटवर्किंग डिवाइस: 4 राउटर और 1 नेटवर्क स्विच हब

दस्तावेज: 05 कूटरचित पहचान पत्र

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान

रौनक सिंह (32 वर्ष), निवासी सैदपुर, नालंदा, बिहार (कॉल सेंटर मैनेजर)

रोशन कुमार (21 वर्ष), निवासी विष्णुपथ, गया, बिहार

अमन कुमार (23 वर्ष), निवासी मंगला बोरिंग, विष्णुपथ, गया, बिहार

अंकित कुमार (25 वर्ष), निवासी रूपौ, नवादा, बिहार

विकास वैभव (25 वर्ष), निवासी कोतवाली, गया, बिहार

मुगलसराय थाने में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66C व 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस फरार सरगना की तलाश कर रही है और वित्तीय लेन-देन के विस्तृत रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

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