व्यास जगत के सूर्य थे गुरुदेव श्रीनाथ मिश्र; डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल।
4/10/26 वाराणसी।रवीन्द्रपुरी स्थित श्रीनाथ भक्ति संस्थानम् के सभागार में श्रीकाशी विद्वत्परिषद्(न्यास)द्वारा मानस रत्न डॉ.श्रीनाथ मिश्र रामायणी का हीरक जयंती महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संस्कृत जगत एवं मानस जगत के भारतवर्ष के प्रमुख गणमान्य विद्वानों की उपस्थिती रही।

प्रथम सत्र में आचार्य कमलाकांत त्रिपाठी जी ने मानस रत्न के प्रति भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को संस्कृत शास्त्रों का ज्ञान नहीं है, वास्तविक रूप में वह मानस की सही व्याख्या नहीं कर सकता, मानसरत्न संस्कृत के निष्णात विद्वान भी थे। बीएचयू से पधारे प्रो.शैलेश तिवारी ने सुंदर संस्कृत के श्लोकों की रचना के द्वारा श्रोताओं को भाव विभोर किया। सत्र का उद्घाटन करते हुए ब्रह्मचारी शंभूप्रेमानंद जी ने इस संक्रमण काल से उभरने में मानस एवं उसमें निहित जो तत्व हैं उसका आश्रय लेना चाहिए।गौ माता जो भगवान के अवतरण के निमित्तों में प्रमुख उनका सम्मान एवं संरक्षण राष्ट्र का गौरव है इस अवसर पर उन्होंने शंकराचार्य जी के कार्यों पर भी प्रकाश डाला। दूसरे सत्र में व्यास सम्मेलन में रामकृष्ण तिवारी जी, पुरंदर व्यास जी, राकेश चंद्र पांडे जी, श्याम नारायण व्यास जी ने भी अपने उद्गार एवं संस्मरणों को श्री रामचरितमानस के उदाहरण के द्वारा प्रस्तुत किया जिसमें मानसरत्न जी के द्वारा सुनाए जाने वाले कथा प्रसंगों में प्रमुख भरत चरित्र की चर्चा हुई। श्री कृष्ण कुमार खेमका ने वक्तव्य देते हुए कल्याण के अंकों को वितरित करवाया।

श्रीकाशीविद्वत्परिषद् के अध्यक्ष डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल ने सत्रों का संचालन करते हुए विभिन्न संस्मरण एवं अपने मानव जगत के गुरु डॉ. श्रीनाथ मिश्र जी के प्रति अपने भाव प्रस्तुत किये। इसके मध्य डॉ.श्रीनाथजी के पौत्र आशीष मिश्र, पुत्र अंजनी नंदन मिश्र सुरेन्द्र मिश्र आदि परिवारी जनों की उपस्थिति रही जिनका अभिनंदन किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन परिषद के अध्यक्ष द्वारा हुआ। संस्कृत विद्याधन विज्ञान संकाय के वरिष्ठ आचार्य धनंजय पांडे ने वेदांत के तत्वों का निरूपण किया। इस अवसर पर योगेश ब्रह्मचारी ,ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के प्रतिनिधि रूप में परमात्मानंद ब्रह्मचारी,उद्योगपति किशन जालान, कार्यक्रम के संयोजक श्रीश दत्त शुक्ल, तारकेश्वर पांडे विभिन्न विद्यालयों से पधारे आचार्य एवं छात्रगण उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त रामानुज संस्कृत महाविद्यालय के अध्यक्ष राकेश कुमार शुक्ल, अभिषेक पाठक विशाल गोण शैलेंद्र शुक्ला प्राचार्य डॉ.लक्ष्मी नारायण दत्त शुक्ल आदि कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही अंत में धन्यवाद ज्ञापन राघवेंद्र पांडे ने किया।

