चकिया में नवरात्रि की धूम: काशी नरेश की ऐतिहासिक नगरी में सजे भव्य पंडाल, मां मुंडेश्वरी की सजीव झांकी बनी मुख्य आकर्षण
चकिया (चंदौली)।
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर काशी नरेश की ऐतिहासिक नगरी चकिया पूरी तरह से भक्ति के रंग में सराबोर हो चुकी है। जनपद चंदौली की यह ऐतिहासिक तहसील मां भगवती के जयकारों और आकर्षक पूजा पंडालों की दूधिया रोशनी से जगमगा उठी है। नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक चहुंओर उत्सव, उल्लास और श्रद्धा का माहौल देखते ही बन रहा है।
दूधिया रोशनी और पंडालों से सजी काशी नरेश की नगरी
काशी राज परिवार के ऐतिहासिक वैभव को समेटे चकिया नगर में जगह-जगह स्थापित भव्य दुर्गा पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। नगर के प्रमुख चौराहों, गलियों और बाजारों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की स्थापना की गई है। शाम ढलते ही आकर्षक विद्युत सजावट और भक्ति गीतों की गूंज से पूरा इलाका शक्ति साधना के केंद्र में तब्दील हो जाता है।
कैमूर की ‘मां मुंडेश्वरी झांकी’ बनी चर्चा का केंद्र
इस वर्ष चकिया में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव में बिहार के कैमूर (भभुआ) स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां मुंडेश्वरी धाम पर आधारित विशेष झांकी लोगों के बीच सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। कारीगरों द्वारा तैयार की गई इस अलौकिक व सजीव झांकी के दर्शन के लिए चकिया सहित आसपास के दर्जनों गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। मां के इस रूप के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो रहे हैं और पूरा पंडाल परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज रहा है।
कला और संस्कृति का अद्भुत संगम
विभिन्न पूजा समितियों द्वारा पंडालों में मां दुर्गा की पारंपरिक प्रतिमाओं के साथ-साथ कई तरह की सामाजिक, आध्यात्मिक और पौराणिक झांकियों का सजीव प्रदर्शन किया जा रहा है। समितियों के युवाओं और आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
पट खुलते ही पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का तांता लगा हुआ है। मां के दर्शन कर क्षेत्रवासी सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना कर रहे हैं।



