देश में महंगाई की आग, आम आदमी की जेब पर भारी बोझ – काली शंकर उपाध्याय की कलम से
नई दिल्ली, 27 मई सब्जी से लेकर पेट्रोल तक, EMI से लेकर स्कूल फीस तक – हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं। आम आदमी पूछ रहा है कि आखिर भारत में महंगाई कम क्यों नहीं हो रही? आइए समझते हैं इसके पीछे की 7 बड़ी वजहें।
1. खाने-पीने की चीजें सबसे ज्यादा महंगी
पिछले 6 महीने में टमाटर 200 रु/kg, दाल 180 रु/kg और आटा 50 रु/kg तक पहुंच गया। वजह:
– *बेमौसम बारिश और गर्मी* से प्याज, टमाटर, गेहूं की फसल बर्बाद
-2026 में अल-नीनो का असर* – मानसून देर से आया, पैदावार 12% कम हुई 72ab
– *भंडारण की कमी* – किसान को रेट नहीं मिलता, बिचौलिये स्टॉक करके दाम बढ़ाते हैं
2. कच्चे तेल का खेल
भारत 85% पेट्रोल-डीजल बाहर से मंगाता है।
-क्रूड ऑयल 90 डॉलर/बैरल* के पार – 2025 के मुकाबले 20% महंगा
डॉलर vs रुपया: 1 डॉलर = 87 रु हो गया। तेल खरीदना महंगा, तो ट्रांसपोर्ट से लेकर सब्जी तक सब महंगी
– नतीजा: हर चीज की ढुलाई कॉस्ट 15% बढ़ गई
3. सप्लाई चेन अभी भी पटरी पर नहीं
कोविड के बाद से दुनिया की सप्लाई चेन टूटी पड़ी है। ऊपर से लाल सागर में जहाजों पर हमले से शिपिंग कॉस्ट 3 गुना हो गई। मोबाइल, दवा, खाद का कच्चा माल लाने में टाइम + पैसा दोनों ज्यादा लग रहा है।
4. सरकार का खर्च vs कमाई
फ्री योजनाएं + इन्फ्रा प्रोजेक्ट: सरकार रोड, एयरपोर्ट, वंदे भारत पर खूब खर्च कर रही है। अच्छी बात है, पर पैसा छापने से मार्केट में नोट ज्यादा हो जाते हैं।
-फिस्कल डेफिसिट 5.8% – यानी कमाई से ज्यादा खर्च। इससे भी महंगाई बढ़ती
5. मजदूरी और डिमांड बढ़ी
मनरेगा नई फैक्ट्रियां: गांव-शहर में लोगों के हाथ में पैसा आया
डिमांड ज्यादा, सप्लाई कम: जब सबके पास पैसा हो और माल कम हो, तो दुकानदार रेट बढ़ा देता है। यही महंगाई है।
6. जलवायु परिवर्तन का असर
2026 में रिकॉर्ड गर्मी पड़ी। गेहूं जल्दी पक गया, आम की फसल 30% खराब। AC, कूलर की डिमांड से बिजली महंगी। ठंडा रखने की कॉस्ट बढ़ी तो दूध, दवा, फल-सब्जी सब महंगी 7.
वैश्विक कारण
रूस-यूक्रेन युद्ध: खाद, गेहूं, सूरजमुखी तेल की सप्लाई घटी
अमेरिका में ब्याज दरें हाई: विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं, रुपया कमजोर हो रहा है
RBI क्या कर रहा है?
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 6.75% कर दिया है ताकि लोन महंगा हो और लोग कम खर्च करें। पर खाने की महंगाई रेट बढ़ने से रोक नहीं पा रहा, क्योंकि वो तो मौसम पर डिपेंड है।
आम आदमी पर असर
एक सर्वे के मुताबिक शहर में 4 लोगों के परिवार का महीने का खर्च 2024 में 25 हजार था, जो अब 34 हजार हो गया है। सैलरी उतनी नहीं बढ़ी।
एक्सपर्ट की राय: अर्थशास्त्री डॉ. रमा शर्मा कहती हैं, “अगले 3 महीने मानसून नॉर्मल रहा तो अनाज सस्ता होगा। पर क्रूड ऑयल 100 डॉलर पार गया तो पेट्रोल 120 रु/लीटर तक जा सकता है।
निचोड़: महंगाई की कोई 1 वजह नहीं है। मौसम, तेल, डॉलर, युद्ध और डिमांड – सब मिलकर आपकी थाली महंगी कर रहे हैं। राहत तभी मिलेगी जब फसल अच्छी होगी और क्रूड सस्ता होगा।







