Friday, August 21, 2026
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बनारस के घाट ज्ञान के द्रष्टा ही नहीं सर्जक भी हैं — प्रो . श्रीप्रकाश शुक्ल

बनारस के घाट ज्ञान के द्रष्टा ही नहीं सर्जक भी हैं — प्रो . श्रीप्रकाश शुक्ल
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आज कोरोना प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवॉक विश्वविद्यालय का पूर्व घोषित वृहद आयोजन स्थगित करते हुए एक प्रतीकात्मक वार्षिक समारोह मनाया गया जिंसमें सीमित संख्या में उपस्थित लोगों ने घाटवॉक के महत्व व उसके सांस्कृतिक स्वरूप पर चर्चा की।यह घाटवाक रीवा घाट से चलकर मानसरोवर व मणिकर्णिका से होता हुआ गाय घाट पर समाप्त हुआ घाटवॉक के दौरान बहुत इस बार कई नयी जानकारी मिली जैसे ‘जब नाव भात हो’ , ‘पोपो’ और हजारा दीप आदि आज इनके बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा और इसके बाद नाव से रेत परिसर में कबीर वाणी की प्रस्तुति से सम्पन्न हुआ।

पंचगंगा घाट पर घाटवॉक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए घाटवॉक के संस्थापक प्रसिद्ध न्यूरो चिकित्सक प्रो.विजय नाथ मिश्र ने कहा कि घाटवॉक सृजन,स्वास्थ्य और शिक्षा तीनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।इससे जुड़ने मात्र से व्यक्ति गति में आ जाता है और तमाम तरह की संकीर्णताओं से मुक्त हो जाता है।सामासिक संस्कृति के प्रमाण के रूप में उन्होंने काशी के घाटों की विस्तार से बात की।

अध्यक्षीय वक्तव्य में भोजपुरी अध्ययन केन्द्र,बीएचयू के समन्वयक व घटवॉक के मानद डीन प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि बनारस के घाट केवल ज्ञान के द्रष्टा ही नहीं हैं बल्कि सर्जक भी हैं।इन घाटों पर केवल हर का ही बोध नहीं होता बल्कि लहर का भी आनंद मिलता है।ये हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं जो हमें एक वृहत्तर संदर्भ प्रदान करती हैं।इस अवसर माननीय दयाशंकर मिश्र , जंत्रलेश्वर यादव,अष्ट भुजा मिश्र,मदन मोहन यादव, डॉ अमरजीत राम ,वाचस्पति उपाध्याय ,जितेंद्र कुशवाहा,अरविन्द ,उमेश गोस्वामी ,मनकामना शुक्ल, डॉ अनिल सूर्यधर,शिव विश्वकर्मा ,शैलेश तिवारी,अवनिन्द सिंह ,एवं ताना बाना समूह के समस्त सम्मानित कलाकार उपस्थित रहें। धन्यवाद ज्ञापन अंत मे जंत्रलेश्वर यादव ने सभी का स्वागत एवं अभिनन्दन के साथ कार्यक्रम को सम्पन्न किया स्व0 तेजू सरदार जी के दोहे के साथ
बाबा बाबा सब कहे,
माई कहे ना कोय।
बाबा के दरबार मे,
माई कहे सो होय।।

UP 18 NEWS से राजेश मिश्रा की रिपोर्ट

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