Friday, August 21, 2026
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राजनैतिक संकट के बारे में रोज नई नई खबरे अखबारों में प्रकाशित

आप सब महानुभावों को बांग्लादेश की वर्तमान परिस्थितियों के बारे सब पता ही होगा क्योंकि वहां 5 अगस्त 2024 के बाद उत्पन्न होने वाले राजनैतिक संकट के कारण वहां व्याप्त अराजकता के बारे में रोज नई नई खबरे अखबारों में प्रकाशित होती रहती है। वहां की हालत भयावह है क्योंकि जो खबरे आ रही है वहां से वह किसी भी सभ्य समाज को दहला ने के लिए काफी हैं। बांग्लादेश के अतीत और इतिहास के बारे में विस्तार से वर्णन करने की जरूरत नहीं है पर आज आपसे सबसे बात की आवश्यकता इसलिए पड़ रही है की वहां से मेरे पास बांग्लादेश से 12 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली से आई विदुषी मधु किश्वर जी के साथ मुझसे मिला। मधु जी ने मुझसे पहले बात की थी की बांग्लादेश के कुछ हिंदू आपसे मिलकर अपनी व्यथा बताना चाहते हैं, में पिछले दिनों शीतकालीन यात्रा पर चारो धाम की यात्रा कर रहा था जिसमे मेरे साथ भारत के विभिन्न प्रांतों से आए करीब 100 लोगों का एक बड़ा समूह भी था, यह बेहद सफल यात्रा थी जिसमे मुझे भगवान के दर्शन पूजन के साथ साथ समाज के विभिन्न लोगों के साथ सुखद सनिध्य का अवसर भी प्राप्त हुआ। इस यात्रा की समाप्ति पर मुझे पहले से तय आगे की यात्रा और कार्यक्रमों में जाना था पर बीच में समय निकाल कर मैं काशी आया क्योंकि मुझे लगा की काशी इस के लिए उचित और सबके लिए सुविधा जनक स्थान था मिलने के लिए। कल शाम मधु जी के साथ आए बांग्लादेशी हिंदुओं के इस प्रतिनिधिमंडल से मैं मिला। यह बैठक कल भगवान केदारेश्वर के सानिध्य में गंगा के मध्यधार में रखी गई क्योंकि मां गंगा हम सबके संतापो को हरने भारत वाली और बनारस को बांग्लादेश को जोड़ने वाली सभी सनातनधर्मियो की धात्री माता है और मन की पीड़ा को सुनने सुनाने के लिए इससे उचित स्थान और क्या हो सकता था? मैने बांग्लादेश से आए हुए सभी हिन्दुओं से बारी बारी से बात की, सबने अपनी अपनी पीड़ा और अनुभव बताए। इस प्रतिनिधिमंडल में आए हुए लोग समाज के अलग अलग क्षेत्रों, व्यवसायों से आए हुए लोग थे जिनमे से कड़यों ने पीना बसेरा बांग्लादेश से दूर दुनिया के अलग अलग देशों में बसा रखा है और अपने अपने जीवन में सफलता की ऊंचाईयों को हुआ है। इन सब लोगों के बीच जो एक बात समान थी वह थी हिंदू होने के नाते उनका उत्पीड़न, उनकी संपत्ति की लूट, हत्या, आगजनी और उनकी बहन बेटियों के होने वाला पाशविक व्यवहार। बांग्लादेश से आए इन हिंदुओं से मैंने पूछा की आप लोग अपना धर्म क्यों नहीं बदल लेते जिससे आप की सभी विपत्तियां एक साथ समाप्त हो सकती हैं? इस पर उनका उत्तर था की हम मरते दम तक इस्लाम स्वीकार करने के बारे सोच भी नही सकते। उनके इस उत्तर से मेरा मन भर आया, मैने सोचा की बांग्लादेश के ये बहादुर हिंदू भारत के उन हिंदुओं से तो बहुत बेहतर है जो थोड़े से लालच में अपने पूर्वजों का मान बेच देते है, अपना धर्म बदल लेते हैं। बांग्लादेश में जैसा कल मुझे बांग्लादेशी हिंदुओं ने बताया जो कुछ हो रहा है वह अभूतपूर्व, भयावह, शर्मनाक और हृदय को द्रवित करने वाला है। वहां भारत के राष्ट्रीय ध्वज को जूते से रौंदते हुए हिंदुओं से कहा जा रहा है की तुम सब अपने देश भारत चले जाओ, बांग्लादेश में तुम्हारी जगह नहीं है। सरकारी नौकरियों में काम करने वाले हिंदुओं को जबरदस्ती नौकरी से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर किया जा रहा है और ऐसी अपमान जनक स्थिति बनाई जा रही है की हिंदू नौकरी से स्वयं त्यागपत्र दे दे। मंदिरों की मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, चढ़ावे के पैसे को लूटा जा रहा है, पुजारियों की हत्याएं की जा रही है, रात के अंधेरे और दिन के उजाले में दरवाजों को खुलवा कर जबरदस्ती महान बेटियों का अपहरण किया जा रहा है, उनके साथ दुराचार कर उन्हे मार दिया जा रहा है और यहां तक की मर जाने के बाद भी उनके साथ दुराचार किया जा रहा है। धर्मान्तरण के लिए उन पर भारी दबाव है और माना करने पर जान से मार देने के खतरे भी हैं। इन लोगों ने बताया की यह स्थिति अनायास ही एक दिन में नहीं बनी, वर्षों से हिंदुओं के साथ बांग्लादेश में यह सब चल रहा है। पहले भी चुनाव हारने पर या फिर किसी भी छोटे बड़े कारणों से हिंदुओ की हत्या और उनके संपत्तियों की लूट पहले भी होती रही और कठमुल्ले

उन्हें धर्म बदलने का दबाव पहले भी लगातार डालते रहे। मंदिरों को तोड़ना, उनकी की संपत्तियों की लूट की घटनाएं पहले भी होती थी पर जब से मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश में सरकार के सलाहकार बन कर सत्ता में आए हैं तब से इन घटनाओं में कई गुना वृद्धि हुई है जो अब दिन प्रतिदिन और ज्यादा भयावह होती जा रही है। एक घटना बताते हुए एक सदस्य ने कहा की हिंदू की राइस मिल जला कर उसमे मौजूद 26000 बोरी चावल भीड लूट ले गई और बाद में मिल में आग लगा दिया। निराशा, अपमान, आर्थिक रूप से विपन्न होने और अवसाद के स्थिति में हिंदुओ में आत्महत्या की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। जो हिंदू बंगलादेश से बाहर जाना चाहते हैं उन्हें बांग्लादेश छोड़ने की अनुमति नहीं मिल रही है ऐसे में जरूरी काम, शिक्षा, व्यवसाय और बीमारियों के इलाज के लिए बांग्लादेशी हिंदू कहां जाएं? हिंदुओं से उनकी खेती की जमीन छीन ली जा रही है। एक अनुमान के अनुसार हिंदुओं से उनकी खेती की करीब 26 लाख एकड़ जमीन छीन ली गई है। हिंदुओं को जो बांग्लादेश के बराबर के हकदार और वहां के नागरिक है उन्हें काफिर कह के अपमानित किया जाता है। हत्या और लूट की शिकायत करने पर पुलिस कोई करवाई नहीं करती, उल्टे शिकायतकर्ता हिंदुओ को ही धमकाती है। इस प्रकार हिंदुओ पर दो तरफा मार है। हिंदुओं के पास ऐसी स्थिति में अपनी दुर्दशा पर सिवाय आंसू बहाने के क्या उपाय है? यही कारण है की बांग्लादेश के निर्माण के समय वहा जहां हिंदुओं की आबादी कुल आबादी की 23 फीसदी थी वह अब घाट कर शायद 7 फीसद रह गई है। बाकी की आबादी कहां गई ? मार दी गई, पलायन गई या फिर जोर जबरदस्ती से उसका धर्म बदल दिया गया। इसके उलट भारत में मुसलमानों की आबादी लगातार बढ़ी, wakf की संपति के नाम पर जमीनों पर बेजा कब्जे के कारण अकूत जमीन मुसलमानो के पास आई। भारत में हर राजनीतिक दल को मुसलमानों की चिंता है क्योंकि उनके पास वोट की ताकत है पर बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ कोई खड़ा होने के लिए तैयार नहीं है। भारत में कोई राजनैतिक दल बांग्लादेश के हिंदुओं की दुर्दशा पर बोलने के लिए तैयार नहीं है जबकि फिलिस्तीन और यूक्रेन पर सभी काफी मुखर है। उन्हे पश्चिम एशिया और यूरोप की चिंता है पर अपने पड़ोस में 80 साल पहले तक भारत का अंग रहे बांग्लादेशी हिंदुओं की फिक्र करने में भय लगता है। इसका कारण आप सबको पता है इसपर विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है। बांग्लादेश का हिंदी अपनी बहन की शादी किसी मुसलमान से करने के लिए तैयार नहीं है, वह उनकी शिक्षाओं और आज के बांग्लादेश के अराजक व्यवहार को अपनाने के लिए भी तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया की बांग्लादेश के हिंदू अपनी मेहनत का खाते है पर किस के सामने हाथ नही फैलाते भीख के। मुझसे भी इन हिंदुओं ने पैसे की मदद जुटाने के लिए मदद की गुहार नही की बल्कि कहा की वह अपने हितों और सम्मान के लिए लड़ते हुए मरना पसंद करेंगे किंतु किसी के सामने अपमानित और हाथ फैलाना पसंद नहीं करेंगे। उनकी बातों में दर्द के साथ हिंदू होने का गौरव भी झलक रहा था पर उनका मन भारी था, हृदय में पीड़ा थी क्योंकि अपमान और बेबसी का अहसास उनको अन को विदिर्ण कर रहा था। बांग्लादेश में चिन्मय iskon के संत जिन्हें अब iskon ने अपने संगठन से निकाल दिया है की जेल भेजे जाने की बात भी उठी जिनके कैसे की अगली सुनवाई की तारीख 2 जनवरी है।

 

मैंने पूरे ध्यान से बांग्लादेशी हिंदू प्रनिधिमंडल की बातें गंगा की धार के मध्य पूरे मनोयोग से शांतिपूर्वक सुना और उनसे ही इस परिस्थिति से निकलने का उपाय पूछा तब उन्होंने कहा की वह लोग शंकराचार्य पीठ के शरणागत है और जो भी निर्देश होगा वह लोग उसका पालन करेंगे। मेरी सीमाएं है और पीठ की मर्यादाएं भी है जिस कारण मैं एक सीमा में ही कुछ कह सकता हूं पर मेरे मन में इनके पीड़ा से उपजी अकथ व्यथा है जिसको बता पाना मुश्किल है। में इनके लिए कुछ करना चाहता था पर क्या करूं ? इस प्रश्न

का समाधान मिल नहीं रहा था। मैंने एक बार फिर उनसे ही पूछा की वह क्या चाहते है ? उन्होंने कुछ मांगे रखीं जो मैं आप लोगों से साझा कर रहा हूं।

 

1. हिंदुओं के लिए बंगला देश में एक अलग राष्ट्र जो भारत की सीमा से लगते हुए क्षेत्र के पास हो या फिर हिंदुओ के लिए स्वायत्त सेफ जोन जिसमे बांग्लादेश सरकार का ज्यादा दखल न हो।

 

2. भारत और बांग्लादेश के बीच आबादी की अदला बदली जिसने बांग्लादेश की हिंदू आबादी भारत में और उसी के अनुपात में सुविधाजनक रूप में मुस्लिम आबादी का बांग्लादेश को भेजा जाय।

 

3. नागरिकता संशोधन कानून के अधीन नियत तारीख के पूर्व तक भारत में निवास करते रहने की बाध्यता को समाप्त करके इसे सदा के लिए खोल दिया जाए जिससे नियत देशों से कभी भी भारत आने वाला हिंदू जो भारत की नागरिकता की मंशा जाहिर करे वह भारत का नागरिक बन सके।

 

4. दुनिया में कहीं भी जन्म लेने वाले हिंदू को स्वाभाविक रूप से भारत का नागरिक माना जाए जैसा की इजरायल में होता है।

 

5. बांग्लादेश केवह हिंदू जो 5 अगस्त 2024 के पहले भारत में वीजा पर आए थे और वीजा अवधि खत्म होने के बाद वापस बांग्लादेश लौटने पर विवश हो उनकी वीजा अवधि को तब तक बढ़ाया जाए जब तक बांग्लादेश में स्थिति सामान्य न हो जाय।

 

6. जबरदस्ती रोजगार और नौकरी से निकाले गए हिंदुओ के लिए रोजगार की व्यवस्था जिससे की हिंदू सम्मानपूर्ण तरीके से अपनी जीविका कमा सकें।

 

7. बांग्लादेश में हिंदुओं के समर्थन और सहयोग के लिए वस्तुस्थिति के मूल्यांकन के लिए शंकराचार्य पीठ की तरफ से एक प्रतिनिधिमंडल का भेजा जाना जो बांग्लादेश के हिंदुओं का मनोबल बढ़ा सके।

 

मुझे लगता है की यह मांगें उचित है और हमे इनके लिए प्रयास करना चाहिए। यद्यपि की इन प्रयासों का परिणाम आने में समय लगेगा और यह भी की इतने प्रयासों मात्र से हिंदुओ के हृदय का क्षोभ और पीड़ा कम होने वाली नहीं है पर प्रयासों को कहीं से तो शुरू करना होगा इसलिए हम काम से काम इतने से शुरू तो करें और आगे के रास्ते अपने आप बनेंगे और ईश्वर ने चाहा तो परिस्थियां जल्दी ही बदलेंगी और भगवान हिंदुओं के पीड़ा की जल्दी ही सुध लेंगे क्योंकि भगवान के घर देर है अंधेर नही ।

 

आप सभी आ बंधु यहां आए, बांग्लादेश से आए हमारे हिंदू भाइयों की पीड़ा आपने सुनी उनके दुख में सहभागी बने इसके लिए आप सबका हृदय से आभार और बंगलादेश से आए हिंदू बंधुओ के लिए हमारा सदा समर्थन और सहयोग का संकल्प और मुखर और तेज होगा इस भावना के साथ आप सबका पुनः आभार और धन्यवाद।

 

UP18न्यूज लाईव से सरफराज खान की रिपोर्ट

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