Saturday, September 5, 2026

जातिगत आरक्षण से पल रहे देश के अमीर लोग, गरीब तबके आज भी आरक्षण से दूर

जातिगत आरक्षण से पल रहे देश के अमीर लोग, गरीब तबके आज भी आरक्षण से दूर

 

काली शंकर उपाध्याय की कलम से

 

देश में आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तथा वंचित लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देना था। लेकिन आज यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आरक्षण का लाभ वास्तव में उन गरीब परिवारों तक पहुंच रहा है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है?

 

आज कई ऐसे संपन्न और प्रभावशाली परिवार हैं, जो पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ लेते हुए आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं, जबकि समाज के अनेक गरीब और जरूरतमंद लोग आज भी अवसरों से वंचित हैं। गरीब की पहचान केवल उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति से भी होनी चाहिए।

 

समय की मांग है कि आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में शिक्षा, रोजगार और सामाजिक अवसरों से वंचित हैं। किसी भी गरीब बच्चे का भविष्य केवल उसकी जाति के आधार पर तय नहीं होना चाहिए।

 

आरक्षण पर बहस समाज को बांटने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए होनी चाहिए। असली सवाल जाति का नहीं, जरूरत और समान अवसर का है।

 

काली शंकर उपाध्याय की कलम से

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