लापरवाह सिस्टम पर भारी पड़ा जनसहयोग: शहाबगंज के अफ़सर सुनाते रहे बजट का रोना, ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर खुद कराई नाली की मरम्मत
चंदौली (शहाबगंज)। विकास के दावों और कागजी योजनाओं की जमीनी हकीकत जनपद चंदौली के शहाबगंज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा दुन्नू में खुलकर सामने आ गई है। जहां एक तरफ सरकार ‘गांव-गांव विकास’ का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासनिक अमले की घोर लापरवाही के चलते ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। महीनों से जाम पड़ी नाली और टूटे चौके की समस्या पर जब जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं, तो ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर समाजसेवी राजीव विश्वकर्मा के नेतृत्व में सफाई और मरम्मत का कार्य पूरा कराया।
अधिकारियों ने दिया बजट का बहाना, समस्याओं से मोड़ा मुंह
ग्राम सभा दुन्नू में लंबे समय से नालियां बजबजा रही थीं और जलजमाव के कारण ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया था। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और ग्राम विकास अधिकारी (सेक्रेटरी) को लिखित आवेदन दिया और व्यक्तिगत रूप से भी गुहार लगाई।
आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने जमीनी कार्रवाई करने के बजाय केवल लंबी-चौड़ी बातें कीं और हर बार “बजट नहीं है” का रोना रोकर पल्ला झाड़ लिया। ग्रामीणों की लगातार अनदेखी ने यह साबित कर दिया कि ब्लॉक स्तर पर बैठे अधिकारी जनता की मूलभूत समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन हो चुके हैं।
समाजसेवी राजीव विश्वकर्मा और ग्रामीणों ने दिखाई राह
जब प्रशासनिक तंत्र से पूरी तरह निराशा हाथ लगी, तो ग्रामीणों ने सिस्टम के भरोसे बैठने के बजाय खुद कदम उठाने का फैसला किया। गांव के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और स्थानीय समाजसेवी राजीव विश्वकर्मा की अगुवाई में जाम नाली की मुकम्मल सफाई कराई और टूटे चौके की मरम्मत का कार्य पूरा करवाया।
लापरवाह अफसरों पर उठे गंभीर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जो अधिकारी जनता के टैक्स से मोटी तनख्वाह लेकर भी उनकी समस्याओं से मुंह मोड़ लेते हैं, उन्हें अपनी कुर्सी पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। जनता का सवाल है कि यदि गांव के विकास कार्यों के लिए ग्रामीणों को ही चंदा लगाना है, तो फिर ब्लॉक में बैठे इन अधिकारियों और कर्मचारियों की क्या उपयोगिता है? ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों पर तत्काल जांच बैठाकर कठोर कार्रवाई की जाए।






