जाल्हूपुर: “बदहाली के आंसू रो रहा गांव, युवा समाजसेवी राजकुमार गुप्ता ने लिया परिवर्तन का संकल्प”। 

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जाल्हूपुर: “बदहाली के आंसू रो रहा गांव, युवा समाजसेवी राजकुमार गुप्ता ने लिया परिवर्तन का संकल्प”।

वाराणसी चिरईगाँव.जाल्हूपुर विकास की दौड़ में जाल्हूपुर ग्राम सभा आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। गांव की बदहाल नालियां, टूटे खड़ंजे और अधूरी पड़ी योजनाएं स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोल रही हैं। इसी बीच, गांव के युवा समाजसेवी और प्रधान पद के प्रबल दावेदार राजकुमार गुप्ता ने जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल करने का आश्वासन दिया।

समस्याओं का अंबार: जनता की जुबानी

गांव के दौरे के दौरान राजकुमार गुप्ता को ग्रामीणों का भारी समर्थन मिला। स्थानीय निवासी रामदीन निषाद ने दुखी मन से बताया, “सालों बीत गए, लेकिन नालियों की सफाई आज तक नहीं हुई। बरसात में गंदा पानी हमारे घरों में घुस जाता है।” वहीं, गृहणी शांति देवी का कहना था कि खड़ंजे इतने जर्जर हैं कि बच्चों और बुजुर्गों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

युवाओं में भी आक्रोश है। गांव के ही अंकित मौर्य ने बताया, “सरकार ने बाजार के लिए फंड तो दिया, लेकिन अभी तक बाजार चालू नहीं हो पाया है। अगर बाजार शुरू हो जाए तो हम जैसे युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा।”

राजकुमार गुप्ता का विजन: “छोटी समस्या, बड़ा समाधान”

जनता से संवाद करते हुए राजकुमार गुप्ता ने कहा कि उनकी प्राथमिकता गांव की ‘छोटी से छोटी’ समस्या को जड़ से खत्म करना है। उन्होंने विशेष रूप से सीवर, नाली और खड़ंजे की खराब स्थिति पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा:

“सरकार की ओर से फंड आने के बावजूद ‘बाजार विधानी’ का चालू न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि जनता का आशीर्वाद मुझे मिलता है, तो मेरी पहली प्राथमिकता इस बाजार को शुरू करवाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। मैं विकास कार्यों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखूंगा, बल्कि उसे धरातल पर उतारूंगा।”

परिवर्तन की लहर

गांव के प्रबुद्ध नागरिक महेश चंद्र और जगत सिंह जैसे लोगों का मानना है कि इस बार गांव को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो शिक्षित हो और समस्याओं के प्रति संवेदनशील हो। राजकुमार गुप्ता की सक्रियता ने गांव के चुनावी समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है।