Friday, August 29, 2025

मिर्जापुर : बंधवा गांव में मनाई जाती है ऐतिहासिक होली काली शंकर उपाध्याय की कलम से.

मिर्जापुर : मझवा विधानसभा के अंतर्गत बंधवा गांव में मनाई जाती है ऐसा ऐतिहासिक होली.

होली भारत का प्रमुख त्यौहार है और बड़े ही उत्साह और सौहार्द के साथ भारत में होली मनाई जाती है लोग एक दूसरे से गले लगते हैं रंग लगाते हैं और मिष्ठान खिलाते हैं और खाते हैं रंग गुलाल उड़ाते हैं और एक दूसरे से प्रेम की भावना रखते हुए गले मिलते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं की मिर्जापुर जिले की बंधवा गांव में ऐतिहासिक होली मनाई जाती है ऐसी होली भारत में कहीं भी नहीं मनाई जाती है इसका मुख्य कारण यह भी है की बंधवा गांव की होली इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है। और क्षेत्रीय की मानें तो उनको पता ही नहीं है कि कब से इस तरह की होली मनाई जाती है, जिस दिन होलिका दहन रहता है उस दिन से लेकर फगुआ तक अलग-अलग तरह के कार्यक्रम किए जाते हैं और लोग होली का आनंद बहुत ही अच्छे तरीके से लेते हैं होलिका दहन के पहले बंधवा गांव के श्रवण शंकर उपाध्याय के घर पर जो बिचलेपुरा में पड़ता है लोग एकत्रित होते हैं और ढोल मजीरा के साथ खूब फगुआ गाया जाता है और जैसे ही होलिका दहन हो जाता है होलिका के पास फिर सब लोग श्रवण शंकर उपाध्याय के घर आते हैं और वहां से नजदीक में ही चौरा माता का मंदिर है जो कि बेचू पटेल के घर के सामने पड़ता है वहां पर तक फगुआ गाते हुए लोग जाते हैं और चौरा माता का दर्शन करते हैं। तदोपरांत फिर श्रवण शंकर उपाध्याय के घर आकर रात भर फगुआ होती है और लोग रंगों से ओतप्रोत होते हैं वैसे बंधवा गांव तीन खंड में बटा है बीचला पूरा खाले का पूरा और सड़क के उस पार उत्तर का पूरा ऐसे ही खाले के पूरा में भी लोग होलिका दहन करते हैं और होलिका दहन करने के बाद खा ल के पूरा में पीपल के वृक्ष के नीचे जो की बहुत ही प्राचीन वृक्ष है वहां पर रात भर फगुआ गाते हैं और रंगों से ओतप्रोत होते हैं और एक दूसरे से गले मिलते हैं उसके बाद सुबह में बिजला पूरा के लोग राजेश उपाध्याय उर्फ पप्पू उपाध्याय के यहां सुबह में एकत्रित होते हैं और भांग और दूध गंगा वहीं पर बनता है और लोग वहां पर फगुआ का आनंद भी उठाते हैं और फिर अपने अपने घर को चले जाते हैं उसके बाद लगभग 3:00 के करीब सब लोग बिचला पूरा और उत्तर का पूरा मिलाकर सब लोग खा ले के पूरा गोजी डंडा बरछा गणआशा टंगरी,  इत्यादि लेकर खाले के पूरा जाते हैं यशोदा मां के मंदिर के पास एकत्रित होते हैं जो कि खाले के पुरा में स्थित है उसके बाद सब लोग वहां से ही फगुआ गाना चालू करते हैं और सतीश उपाध्याय के घर से होते हुए सब को रंग लगाते हुए फगुआ में वह प्रोत होते हुए सब लोग धीर उपाध्याय के घर जाते हैं उनके घर पर नाल है जो कि पूरा पत्थर का बना होता है गोल आकार होता है, उसे गांव के नवयुवक उठाते हैं जो साल भर व्यायाम करते हैं और नाल उठाने का इच्छा रखते हैं वहां से नाल उठाते हैं, और गांव वाले उनको प्रोत्साहन देते हैं और इनाम भी देते हैं, उसके बाद वहां से वहां से सब लोग कृष्णकांत उपाध्याय के घर जाते हैं वहां पर भी नाल उठाते हैं और सभी लोग उत्साह वर्धन करते हैं उसके बाद यही प्रक्रिया कमलेश उपाध्याय के घर पर भी होती है और मेवा लाल उपाध्याय के घर पर भी सब लोग जो कि प्राचीन नाम है जो बहुत प्रचलित  है, वहां पर भी उठाते हैं और एक दूसरे का उत्साहवर्धन करते हैं और वहां से सब लोग फिर भी  फगुआ गाते हुए आते हैं, और स्वर्गीय माता प्रसाद उपाध्याय के घर पर नाल उठाते हैं दूसरे का उत्साह वर्धन करते हैं और फिर गांव के तीसरे पूरा उत्तर के पूरा के तरफ लोग जाते हैं वहां पर भी एक बहुत प्राचीन नाल है, उसको लोग उठाते हैं और उत्साह वर्धन करते हैं कुछ लोग इनाम भी देते हैं, 50 किलो से लेकर डेढ़ कुंटल तक की नाल होती है जो पूरा गोल आकार का होता है और उसे ही लोग उठाते हैं, फिर उसके बाद वहां से 3 किलोमीटर की दूरी पर जमुआ बाजार है जहां पर गांव के सभी लोग पैदल जाते हैं और लगभग 3 घंटा लगातार रास्ते भर फगुआ का गीत गाते हुए जाते हैं पूरा अपना हथियार से लैस पूरे गांव वाले कोई गोजी लिया है कोई डंडा लिया है कोई फरसा लिया है कोई गानासा लिया है कोई तलवार लिया है सब लोग लेकर जमुआ पहुंचते हैं और बखूबी तरीके से हजारों की संख्या में होली का आनंद लेते हुए जमुआ में पोखरे पर स्थित भगवान शिव के मंदिर पर शिव का फगुआ होता है और फिर वहां से लोग गांव की तरफ चले आते हैं बाजार से घर के लिए मिठाई वगैरह लेना बाजार में पान खाना एक दूसरे से मिलना उसके बाद अपने गांव की तरफ सब लोग चले आते है।

काली शंकर उपाध्याय की स्पेशल रिपोर्ट

 

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