Friday, August 29, 2025

पूर्वांचल के उत्थान पर लिखित पुस्तक “जागो पूर्वांचल” का हुआ लोकार्पण।

पूर्वांचल के उत्थान पर लिखित पुस्तक “जागो पूर्वांचल” का हुआ लोकार्पण।

 

चन्दौली ब्यूरो/पं.दीनदयाल उपाध्याय नगर के बाटी-चोखा रेस्टोरेंट में आयोजित कार्यक्रम “जागो पूर्वांचल “लेखक चन्द्र भूषण मिश्र के पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम किया गया, इस दौरान कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला जज डॉ चन्द्रभाल सुकुमार जी,महिला उद्यमी एवं भारतीय संस्कृति और संस्कार की प्रेणात्मक प्रतीक वंदना सिंह व वरिष्ट साहित्यकार डॉ उमेश प्रसाद सिंह जी व राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कृषि ऋषि श्री प्रकाश सिंह रघुवंशी जी रहे।अध्यक्षता डॉ संभाजी बाविस्कर (कुलपति ) विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर बिहार के स्नेहिल उपस्थिति में हुई । पूर्वांचल तमाम गणमान्य के साथ पूर्वांचल कई जिलों से आये पूर्वांचल प्रेमियों के उपस्थिति पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा के लिए गरिमामयी रही इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम अतिथियों को आदर प्रदान कर स्वागत किया गया ।

 

कार्यक्रम में अतिथितियों द्वारा दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंम्भ किया और महिला प्रितिनिधित्व द्वारा भारत माता तस्वीर पर माल्यार्पण कर भारत माता की जय के समोहिक उदघोष से पूर्वांचल के सम्मान और स्वाभिमान के विषय पर लिखी गई पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में आये समस्त अतिथियों के अभिवादन की घोषणा की गई।कार्यक्रम के शुभारंभ में प्रकाशक के पक्ष से डॉ विनय वर्मा की ओर से पुस्तक और पुस्तक के लेखक पर प्रकाश डालते हुए कहा गया की पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा के संरक्षक द्वारा लिखित इस पुस्तक में पूर्वांचल राज्य आंदोलन पर आधारित विचारो के साथ महामहिम राज्यपाल जी द्वारा लिखित पत्र आंदोलन गीत

लेखक- चंद्रभूषण मिश्र ‘कौशिक” के आन्दोलात्मक पद्ध्यति पर तमाम रोचक राय शुमारी भी हैं ।

विचारकों ने कहा कि चिंतक, कवि व समाजसेवी आदरणीय चंद्र भूषण मिश्र ‘कौशिक जी’ पिछले कई वर्षों से पृथक पूर्वांचल राज्य आंदोलन से जुड़े रहे हैं । उन्होंने ” *जागो पूर्वांचल*” पुस्तक के माध्यम से अलग पूर्वांचल राज्य की महत्ता व उपयोगिता के बारे में इस

 

पुस्तक में विस्तार से बताया है। उन्होंने अलग पूर्वांचल राज्य पर लोगों की राय भी इसमें डाली है। यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए दिग्दर्शिका साबित होगी जिनके मन में बड़े व छोटे राज्य के विकास की अवधारणा को लेकर उथल-पुथल मचता रहता है।

अंगवस्त्र देकर वक्ताओं को सम्मान से विचार का अवसर दिया गया जिसमें पूर्वांचल के उत्थान के विविध पहलुओं पर गम्भीरता ध्यान देने की वकालत की खुली चर्चा हुई। पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा के अध्यक्षा श्रीमतीं सीमा सिंह ने कहा – हमें गर्व हैं कि पूर्वांचलीओ के स्वाभिमान और सम्मान के पक्ष में लिखी यह् पुस्तक पूर्वांचल के हक में एक शिलालेख की भांति होगी । सोनभद्र से आये संस्था के महासचिव एडवोकेट पवन कुमार सिंह ने कहा – विचार क्रांति से ही बदलाव क्रांति का जन्म होता हैं यह पुस्तक पूर्वांचल के हक और हित में एक विचार क्रांति साबित होगी । प्रोफेसर अनिल यादव जी अपने लेखक शिष्य को यशस्वी और विजयीभव के आशीर्वचन से लेखक के आन्दोलात्मक लेखन के साथ व्यवहारिक संघर्ष की प्रसंसा किया ।पूर्वांचल के विभिन्न हिस्से से आये पूर्वांचल प्रेमी समाज के डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, समाजसेवी, उद्योगपति आदि लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का कुशल एवं सफल मंच संचालन संजय शर्मा और धन्यवाद ज्ञापन कवि इंद्रजीत निर्भीक जी ने किया ।

 

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी जी के स्नेह प्राप्त मंगल केवट , रेलवे से सेवानिवृत्त राजभाषा अधिकारी श्री दिनेश चंद्रा , भीख उन्मूलन और शिक्षा संवर्धन की प्रतीक श्रीमतीं प्रतिभा सिंह व इस पुस्तक में सहयोगी टीम रही अंजना राय, सुलेखा सिंह , विमलेश त्रिपाठी ,आनंद बोधि ,काकू सिंह ,कवि सुरेश अकेला ,वरिष्ट पत्रकार पवन तिवारी,शरद चंद मिश्रा ,सुधीर भाष्कर पाण्डेय, मनोज कुमार पाठक, पूजा ,नम्रता ,राजा राम की भी रही ।

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