Friday, August 29, 2025

0-म्योरपुर के पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी एसपी सहाय के कार्यकाल में शिक्षकों ने कई कारनामों को दिया अंजाम 0-वर्तमान खंड शिक्षा अधिकारी की जांच के बाद प्रधानाध्यापिका हुई निलंबित

0-म्योरपुर के पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी एसपी सहाय के कार्यकाल में शिक्षकों ने कई कारनामों को दिया अंजाम
0-वर्तमान खंड शिक्षा अधिकारी की जांच के बाद प्रधानाध्यापिका हुई निलंबित
0-401 नामांकन के सापेक्ष महज 99 छात्रों की ही उपस्थिति
0-घोटाले के प्रकरण की जांच खंड शिक्षा अधिकारी दुध्दी को सौंपा गया।
सोनभद्र(विनोद मिश्र)
भ्रष्टाचार के आतंक में डूबे हुए पूर्व में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी एसपी सहाय के दौरान म्योरपुर ब्लाक के शिक्षकों की चांदी करती रही और वहां तैनात शिक्षकों ने इसका जमकर फायदा उठाया परिणाम स्वरूप योगी सरकार के साफ-सुथरी छवि पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है जी हां यह मामला कम्पोजिट विद्यालय कोटा पुनर्वास में तैनात प्रधानाध्यापिका सुशीला देवी के काले कारनामों से भरा पड़ा है ।इस प्रधानाध्यापिका द्वारा मध्यान्ह भोजन योजना में जमकर धांधली की गई 20 से 25 कुंटल खाद्यान्न तथा लगभग दो से तीन लाख वार्षिक कन्वर्जन कास्ट की धनराशि को डकार गई इस बात का खुलासा वर्तमान खंड शिक्षा अधिकारी देवमणि पांडे की जांच आख्या के बाद हुआ, आनन-फानन में घोटालेबाज प्रधानाध्यापिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और इसे प्राथमिक विद्यालय रानी ताली से संबद्ध कर दिया गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रकरण की जांच खंड शिक्षा अधिकारी दुद्धी को सौंपी गई है और एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है
बताते चलें कि 19 अक्टूबर22 को कार्यरत प्रधानाध्यापिका सुशीला देवी के विद्यालय पर जांच टीम पहुंची तो वहां पर 401 नामांकित छात्र-छात्राओं के सापेक्ष महज 99 बच्चे ही उपस्थित मिले जांच टीम द्वारा एमडीएम पंजिका मांगने पर प्रधानाध्यापक द्वारा बताया गया कि वह मेरे घर पर है जब उनसे पंजिका मंगवाया गया तो 3 कार्य दिवसों में उपस्थित छात्र-छात्राओं की संख्या 401 के सापेक्ष 200 ,208 ,208 दर्शाया गया है ताज्जुब तो उस समय हुआ प्रेरणा पोर्टल पर महज 169 बच्चों को दर्शाया गया है जिसमें से 156 ही प्रमाणित है खंड शिक्षा अधिकारी देवमणि पांडेय ने बताया कि विद्यालय की सहायक अध्यापिका सुनीता राय को वित्तीय एवं अभिलेख का प्रभार सौंपा गया है
बड़ा सवाल यह है आखिरकार क्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निलंबन कर देने से दोबारा शिक्षिका भ्रष्टाचार नहीं करेगी और ऐसी शिक्षिकाओं को सीधे बर्खास्तगी के साथ ही साथ विभागीय रकम की वसूली भी की जानी चाहिए ,देखना यह है क्या खंड शिक्षा अधिकारी दूध्दी वास्तव में निष्पक्षता पूर्वक जांच करते हैं या फिर वही म्योरपुर के पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी एसपी सहायक की भांति गोल-गोल रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं जो योगी सरकार के कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं

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