सर्व प्रथम मैं अपने कलम के माध्यम से यह नहीं चाहता हूं कि किसी को मेरे कलम से कोई तकलीफ हों, लेकिन कभी-कभी ऐसे ऐसे हृदय को कचोट लेने वाली बात सामने आती है जिससे कि दिल में ऐसी बात आ जाती है कि उसे कलम के माध्यम से बाहर लाना पड़ता है भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता यानी कि मीडिया को माना जाता है, लेकिन वर्तमान समय में पत्रकारिता की स्थिति क्या बनी हुई है यह आम जनमानस से नहीं छुपा है अवैध वसूली से लेकर लोगों के पैर छूना आजकल के पत्रकारों के निजी दिनचर्या में हो चुका है एक समय ऐसा भी था कि पत्रकार जहां पर बैठते थे या पत्रकार के नाम सुनकर भी लोगों के पसीने छुटा करते थे लेकिन कुछ ऐसे पत्रकार जो लोगों के पैर छूने लगे हैं और उससे पत्रकारिता पर काला धब्बा लगा रहे हैं इन सब चिट पुटिए पत्रकारों की वजह से लोक तंत्र के चौथे स्तंभ का गला रेता जा रहा है, और आम जनमानस पत्रकारों को दलाल के रूप में देखती नजर आ रही है वर्तमान समय में पत्रकारों की छवि जिस तरह से इन लोगों की वजह से बनी हुई है यह भी एक खराब बनी हुई स्थिति है, ऐसे ही कुछ गिने-चुने लोगों की वजह से प्रेस कांफ्रेंस इत्यादि जगह पर अच्छे पत्रकार नहीं जाते हैं क्योंकि कुछ ऐसे चुनिंदा पत्रकारों ने समाज की ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जिससे कि अच्छे पत्रकार प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाने से भी कतराते हैं क्योंकि उनके माथे पर कहीं ना कहीं दलाली का धब्बा ना लग जाए लेकिन क्या एक पत्रकार पहले के जैसा मान सम्मान और एक समाज का चौथा स्तंभ या यूं कह लें की समाज का दर्पण बनकर समाज में अपनी कलम की ताकत को दिखा पाएगा या इन सब गिने-चुने पत्रकारों के पैर छूने वाली पत्रकारिता से दब जाएगा समाज में चुनिंदा लोगों की वजह से कलम कारों की स्थिति बहुत ज्यादा खराब चल रही है देखना यह है कि यह पैर छुओ पत्रकारिता कब तक सफल होती है और कब तक समाज इनको अपने पैर तक सीमित रखती है अपनी कलम के माध्यम से अगर मैं किसी निजी व्यक्ति को आहत किया हूं तो यह मेरा दुर्भाग्य होगा मेरा इस लेख का माध्यम सिर्फ इतना था कि कलमकार हमेशा से मजबूत रहा है और मजबूत रहेगा कभी भी किसी के सामने मजबूर नहीं रहेगा मजबूत रहेगा,