कीनारामी और गोरखनाथ पीठाधीश की शिष्टाचार मुलाक़ात
जब से उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री, गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर, योगी आदित्यनाथ बने हैं तब से संत एवं मठ-मंदिर की प्राचीन भारतीय संस्कृति का गौरव लौटाने के लिए वो सतत प्रयत्नशील हैं । विभिन्न परंपराओं के साधू-महात्माओं से आशीर्वाद ग्रहण करते हैं, उनसे लगातार विचार-विमर्श करते हैं । लेकिन वाराणसी स्थित चरम अध्यात्मिक अवस्था वाली अघोर-परंपरा के केंद्र-बिंदू तथा अघोर-परंपरा के विश्वविख़्यात हेडक़्वार्टर , ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’, के प्रति गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर का समर्पण ध्यान देने लायक है । ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ के पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के प्रति योगी आदित्यनाथ का आदर और अटूट स्नेह हमेशा ही नज़र आता है । दिनांक 25 मार्च को जब दोनों पीठाधीश्वरों की मुलाक़ात लखनऊ, मुख्यमंत्री आवास, में हुई तो ये नज़ारा एक बार फ़िर से सबके सामने आया । मुख्यमंत्री ने शॉल व् श्रीफल देकर अघोराचार्य महाराजश्री का सत्कार किया । अति-प्रसन्न वातावरण में दोनों संतों की मुलाक़ात के आध्यात्मिक-धार्मिक क्या मायने हैं, इसका अंदाज़ लगाना तो मुश्क़िल है लेकिन सतही तौर पर इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक़ चंदौली जिले के रामगढ़ नामक स्थान पर (अघोर-परम्परा के वर्तमान स्वरुप के जन्मदाता ) बाबा कीनाराम जी की जन्मस्थली पर चल रहे कार्यों को लेकर दोनों संतों में चर्चा हुई । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा सिद्धार्थ गौतम राम को आश्वस्त किया कि रामगढ़ में चल रहा कार्य नियत समय पर शानदार तरीके से पूरा हो जाएगा । ग़ौरतलब है कि बाबा कीनाराम जी की जन्मस्थली के नवीनीकरण तथा सौंदर्यीकरण के लिए उत्तर-प्रदेश सरकार ने कई करोड़ की धनराशि आवंटित की है और ख़ुद मुख्यमंत्री यहां के कार्यों पर व्यक्तिगत तौर पर नज़र रख रहे हैं । इस मुलाक़ात के दौरान ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ के प्रधान व्यवस्थापक अरुण सिंह भी मौजूद थे , मीडिया प्रभारी संजय सिंह