सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय के भीतर फैसला करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि यथास्थिति बहाल नहीं की जा सकती क्योंकि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया और अपना इस्तीफा दे दिया। *सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बातें…*
2016 का फैसला सही नहीं था। इसमें कहा गया था कि डिप्टी स्पीकर या स्पीकर के खिलाफ अयोग्यता का मामला है तो उसे कोई फैसला लेने का अधिकार नहीं होगा।
स्पीकर ने कोशिश नहीं की कि शिवसेना की ओर से शिंदे गुट के गोडावले आधिकारिक व्हिप हैं या फिर उद्धव गुट के प्रभु। स्पीकर को यह जरूर पता होना चाहिए कि राजनीतिक पार्टी ने किसे व्हिप चुना है।
स्पीकर ने शिंदे गुट वाले गोडावले को व्हिप नियुक्त किया, यह फैसला गैरकानूनी था। नवंबर 2019 में विधायकों ने एकमत होकर उद्धव ठाकरे को पार्टी का लीडर चुना था।
महाराष्ट्र में शिंदे और उनके गुट के 15 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले पर बड़ी बेंच को विचार करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर विधायक सरकार से बाहर होना चाहते हैं तो वो केवल एक गुट बना सकते हैं।
✍️ UP 18 NEWS से आशीष मोदनवाल की रिपोर्ट