200 वर्ष पुरानी चिकित्सा पद्धति है होम्योपैथ – डॉ पूजा गुप्ता
19 वीं शताब्दी से ही होम्योपैथिक दवाओं और डॉ हैनिमैन द्वारा तैयार की गई दवा की प्रणाली पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ता गया है। वर्तमान में विश्व भर में लगभग 20 करोड़ लोग होम्योपैथिक दवाओं या उपचारों को अपनाते हैं और भारत में होम्योपैथी चिकित्सा की दूसरी सबसे लोकप्रिय प्रणाली है
वाराणसी भेलूपुर जैन मंदिर के बगल में स्थित “द वाराणसी क्लिनिक एंड होम्योपैथिक रिसर्च सेंटर की प्रमुख डॉ पूजा गुप्ता बताती है कि “होमियोपैथी व्यक्ति के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित करने पर बल देती है। यह दवा की एक ऐसी प्रणाली है जो शरीर की स्वयं को ठीक कर लेने की क्षमता का सम्मान करती है तथा इस कार्य में सहायक बनती है।होम्योपैथी चिकित्सा में विभिन्न रोगों का इलाज करने के लिए पौधों और खनिजों जैसे प्राकृतिक पदार्थों की छोटी-छोटी खुराकों का उपयोग होता है। इस प्राचीन पद्धति से बुखार, खांसी, गठिया और डायबिटीज. यूटीआई किडनी स्टोन,हड्डी रोग कार्पल टनल सिंड्रोम एसीएल टीयर जोड़ों का उपचार,नेत्र रोग मोतियाबिंद इलाज दृष्टि संबंधी इलाज,नाक कान गला कान संबंधी इलाज नाक की सर्जरी …अधिक वैस्कुलर वैरिकोज वेन्स जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ हिस्टेरोस्कोपी महिला जननांग समस्याएं सिस्ट संबंधी समस्याएं …अनेक विसंगतियों और वैज्ञानिक प्रमाणिक्ता के बावजूद भारत सहित अनेक विकासशील देशों मे होमियोपैथी सस्ते और सुलभ चिकित्सा का महत्वपूर्ण अंग बना हुआ है।
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति मे स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज की विचार धारा अलग मॉर्डर्न मेडिसिनसिस्टम से पूरी तरह से अलग है. होम्योपेथिक चिकित्सा के अनुसार शरीर मे खुद को ठीक करने की क्षमता होती है,
होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में न सिर्फ रोग का इलाज किया जाता है, बल्कि उसके कारण को जड़ से खत्म करके व्यक्ति को फिर से स्वस्थ भी किया जाता है। यदि सरल भाषा में कहें तो होम्योपैथी में न सिर्फ रोग का इलाज किया जाता है, बल्कि उसका कारण बनने वाली समस्याओं को ठीक करके जड़ से समस्या का समाधान किया जाता है।