- वाराणसी।चिरईगांव ग्राम पंचायत ऊकथी के ग्राम प्रधान रामजनम यादव के द्वारा पांचवें वित्त/ 15वें वित्त व एसएलडब्ल्यूएम योजना के तहत कराए गए कार्य में अनियमितता, गबन पाए जाने पर जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने 20 दिसंबर को प्रधान के वित्तीय व प्रसाशनिक अधिकार पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही गांव के विकास कार्य सुचारू रूप से संचालित करने के लिए त्रिस्तरीय समिति नामित किया है। गांव की अंतिम जांच के लिए उपायुक्त एनआरएलएम को नामित किया है।
उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत ऊकथी की जांच जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) व अपर जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा प्रस्तुत 27 अगस्त के रिपोर्ट में ग्राम प्रधान ऊकथी को वित्तीय गबन का दोषी पाया गया। जिस पर उनको 95(1जी) के तहत दो सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर पक्ष
प्रस्तुत करने को कहा गया था। प्रधान द्वारा दिए गए नोटिस के जवाब और 18 सितंबर के व्यक्तिगत सुनवाई के उपरांत प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। गबन की कुल धनराशि 1,20,085 रुपये का आधा 60,042 रुपये प्रधान द्वारा जमा कर दिया गया।
जिस पर जिलाधिकारी ने उप्र पंचायती राज (प्रधानों, सदस्यों को हटाया जाना) जांच नियमावली 1997 के नियम 5 में निहित प्रावधान के अनुसार प्रधान रामजनम यादव के वित्तीय व प्रशासनिक शक्तियों पर रोक लगाई है। गांव की अंतिम जांच के लिए उपायुक्त एनआरएलएम को नामित किया है।
वहीं, गांव में विकास कार्यों को सुचारु रूप से संचालन के लिए त्रिस्तरीय समिति में श्यामनारायण मौर्य, लालमनी और मंजू देवी को नामित किया है। जिलाधिकारी द्वारा निर्गत उक्त आदेश की प्रति संबंधित लोगों को उपलब्ध कराने को भी निर्देशित किया गया है।