वाराणसी। जिले की ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त एवं केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से चल रहे विकास कार्यों की धीमी प्रगति और गुणवत्ता में कमी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) आदर्श द्वारा सीएम-डैशबोर्ड पर वाराणसी की गिरती रैंकिंग को गंभीरता से लेते हुए छह विकास खंडों के एडीओ पंचायतों को चेतावनी दी गई है, साथ ही उनके जून माह के वेतन पर रोक लगा दी गई है।
यह कार्रवाई हरहुआ, चिरईगांव, चोलापुर, पिंडरा, आराजीलाइन और काशी विद्यापीठ ब्लॉकों के एडीओ पंचायतों पर की गई है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने समयबद्ध तरीके से ग्राम पंचायतों में चल रहे कार्यों की निगरानी और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया, जिससे योजनाओं की प्रगति पर नकारात्मक असर पड़ा।
जिला पंचायत राज अधिकारी आदर्श ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समय से पूरा किया जाना चाहिए। इस दिशा में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सिर्फ एडीओ पंचायत ही नहीं, बल्कि संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों पर भी सख्त कार्रवाई की गई है। विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले 19 सचिवों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है, जो उनके सेवा अभिलेख में दर्ज की जाएगी और आगे उनके कैरियर पर प्रभाव डाल सकती है।
डीपीआरओ ने स्पष्ट किया कि सभी एडीओ पंचायत को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने ब्लॉकों में कार्यों की नियमित समीक्षा करें, ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें और सीएम-डैशबोर्ड पर डाटा अपडेशन समय से कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि आगे किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन की यह सख्ती पंचायत अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब लापरवाही का कोई स्थान नहीं है।