गंगा के बढ़ते जलस्तर से ढाब क्षेत्र के किसानों की बढ़ी मुश्किलें, फसलें डूबने की कगार पर
चिरईगांव/वाराणसी। गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने चिरईगांव विकास खंड के ढाब क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में गंगा की उपधारा ‘सोता’ के किनारे बसे रामचन्दीपुर से मोकलपुर तक के किसानों की सब्जी की फसलें जलमग्न होने की कगार पर हैं। हालांकि अभी जलस्तर ने पूरी तरह खतरे का रूप नहीं लिया है, लेकिन स्थिति तेजी से बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सब्जियों की फसल पर मंडरा रहा खतरा
स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने सोता की तलहटी में परवल, लौकी, नेनुआ, भिंडी जैसी हरी सब्जियों की खेती की है, जो अब बाढ़ के पानी की चपेट में आने को है। यदि पानी का स्तर इसी गति से बढ़ता रहा, तो एक से दो दिन में खेतों में पानी भर जाएगा और फसलें नष्ट हो जाएंगी।
पशुओं के चारे की भी किल्लत की आशंका
खेती से जुड़े किसान ही नहीं, बल्कि पशुपालकों के लिए भी चिंता बढ़ गई है। यदि सब्जी और चारे की फसलें डूब गईं, तो पशुओं के लिए हरे चारे की भारी किल्लत हो सकती है। इससे दूध उत्पादन और पशुपालन पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
ग्रामीणों की समस्याएं और प्रशासन से मांग
रामचन्दीपुर, मोकलपुर, गोबरहा और मुस्तफाबाद के किसानों— संजय सिंह, इंद्रजीत सिंह.सतीश सिंह, बागीश सिंह, अर्चना सिंह, देवेंद्र सिंह. तहसीलदार सिंह अखिलेश सिंह शोभू यादव आदि ने बताया कि अभी तक नुकसान सीमित है, लेकिन समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
अम्बा-मोकलपुर घाट पर ग्रामीणों द्वारा चलायी जा रही नाव के सहारे फिलहाल आवागमन हो रहा है, लेकिन यह व्यवस्था अस्थायी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से घाट पर स्थायी नाव उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बाढ़ की स्थिति में लोगों का आना-जाना बाधित न हो।
किसानों की दो प्रमुख मांगें:
अम्बा-मोकलपुर घाट पर सरकारी नाव की स्थायी व्यवस्था की जाए।
पशुपालकों के लिए भूसे और चारे की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष:
गंगा का बढ़ता जलस्तर ढाब क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी बन गया है। यदि समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह कृषि, पशुपालन और स्थानीय जीवन पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। किसानों की अपील है कि प्रशासन स्थिति की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई करे।