वाराणसी के शिवपुर l विधानसभा क्षेत्र से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी श्री गिरीश चंद्र पांडे (उर्फ गुड्डू पांडे) और उनके समर्थकों की हालिया गिरफ्तारी ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मलदहिया चौराहे पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद हुआ यह घटनाक्रम लोकतंत्र में विरोध के स्वर और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को रेखांकित करता है।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और इसके राजनीतिक निहितार्थों पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत है:
लोकतंत्र में विरोध की गूँज: कोटवां निवासी गिरीश चंद्र पांडे की गिरफ्तारी और कांग्रेस का संघर्ष
वाराणसी का चिरईगांव ब्लॉक और विशेषकर कोटवां ग्राम आज चर्चा के केंद्र में है। यहाँ के निवासी और शिवपुर विधानसभा से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी श्री गिरीश चंद्र पांडे, जिन्हें क्षेत्र में ‘गुड्डू पांडे’ के नाम से जाना जाता है, ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता का परिचय दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (E.D.) की कार्यप्रणाली और भारतीय जनता पार्टी की नीतियों के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरना उनके संघर्षपूर्ण तेवरों को दर्शाता है।
घटनाक्रम: माल्यार्पण से गिरफ्तारी तक
वाराणसी के प्रमुख केंद्र मलदहिया चौराहे पर स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना एक प्रतीकात्मक शुरुआत थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि वे देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हैं। माल्यार्पण के तुरंत बाद, गिरीश चंद्र पांडे के नेतृत्व में कांग्रेस जनों ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से E.D. जैसी संस्थाओं के कथित दुरुपयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
जैसे ही विरोध प्रदर्शन ने गति पकड़ी, पुलिस बल ने हस्तक्षेप किया। भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए गिरीश चंद्र पांडे और दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का तर्क था कि बिना अनुमति के प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया, जबकि कांग्रेस ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया।
विरोध के मुख्य बिंदु: E.D. और राजनीतिक प्रतिशोध
इस प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु E.D. (प्रवर्तन निदेशालय) का विरोध था। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्ष की आवाज दबाने के लिए कर रही है। गिरीश चंद्र पांडे ने गिरफ्तारी से पूर्व मीडिया और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी विपक्ष जनता के मुद्दों को उठाता है, तो एजेंसियां सक्रिय कर दी जाती हैं।
* संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि एजेंसियां केवल विपक्षी नेताओं को लक्षित कर रही हैं।
* महंगाई और बेरोजगारी: विरोध प्रदर्शन में केवल E.D. ही नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई और स्थानीय समस्याओं को भी भाजपा की विफलताओं के रूप में पेश किया गया।
गिरीश चंद्र पांडे का राजनीतिक कद
शिवपुर विधानसभा से प्रत्याशी रह चुके गिरीश चंद्र पांडे की क्षेत्र में गहरी पैठ है। चिरईगांव और कोटवां के निवासी होने के नाते, वे स्थानीय स्तर पर एक कद्दावर चेहरा माने जाते हैं। उनकी गिरफ्तारी ने न केवल शिवपुर बल्कि पूरी वाराणसी कांग्रेस में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। समर्थकों का मानना है कि इस तरह की दमनकारी कार्रवाई से उनका मनोबल टूटने के बजाय और मजबूत होगा।
निष्कर्ष: संघर्ष की राह
लोकतंत्र में विरोध जताना विपक्ष का मौलिक अधिकार है। मलदहिया चौराहे पर हुई यह घटना यह स्पष्ट करती है कि आने वाले समय में वाराणसी की राजनीति और अधिक गरमाने वाली है। भाजपा की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस का यह रुख आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत ज़मीन तैयार करने की कोशिश है। गिरीश चंद्र पांडे और उनके साथियों की गिरफ्तारी ने यह संदेश दिया है कि वे जेल जाने से नहीं डरते और जनता की आवाज उठाते रहेंगे।





