उत्तर प्रदेश: इस समय उत्तर प्रदेश में चुनावी दामों मदार अपने लाबो लवाब पर हैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठता है. इतिहास गवाह है कि पूर्वांचल की राजनीति तय करती है कि कौन आखिरकार सुबे का मुख्यमंत्री बनेगा लेकिन इस समय पूर्वांचल में ज्यादा कर रसूखदार लोग राजनीति में अपना पैर फैलाए पडे हैं और हर विधानसभा में अपने रसूखदारी का लालच आम जनमानस को दिये पढ़े हैं इसमें मारन उन नेताओं और समाजसेवियों का हो जाता है जो लगातार निरंतर जनता की सेवा में लगे रहते हैं और उसी समय यह रसूखदार अपने कमाई के पीछे और जनता का खून कैसे पिया जाए यह करते रहते हैं जैसे चुनाव आता है जिस तरह से बरसाती मेंढक बरसात में दिखाई देते हैं उसी तरह से यह रसूखदार टिकट मांगने के लिए पार्टी में लाइन लग जाते हैं ,और इनकी चलती भी है सिर्फ इसलिए क्योंकि यह मनचाहा रकम पार्टियों तक पहुंचाते हैं और टिकट लेने में भी कामयाब हो जाते हैं लेकिन पार्टी वालों को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा कि जो नेता समाजसेवी अनवरत समाज की सेवा कर रहा है और एक जन सेवक के रूप में विधायक या सांसद का पद लेना चाहता है और जनता इसके लिए हर मुश्किल में उतारू भी रहता है .लेकिन जब रसूखदार अपने रुपए के बल पर इन लोगों के पास पहुंचते हैं तो आम जनमानस और कुछ लोग इन रसूखदारओं का गुण गाने में पीछे नहीं रहते हैं अब देखना यह है कि 2022 की विधानसभा चुनाव में में कौन सी पार्टी कितने रसूखदार ओं को टिकट देती है. और अपनी पार्टी का लुटिया डुबोती है।.