धनुष यज्ञ एवं सीता स्वयंवर का वर्णन
भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ते ही जय जयकारों से गूंज उठा पांडाल
रावर्ट्सगंज (सोनभद्र)
वाराणसी शक्तिनगर मार्ग पर स्थित मधुपुर बाजार के उत्तरी छोर पर रामलीला मैदान में नव दिवसीय रामकथा के आयोजन में सातवें दिन मंगलवार की रात्रि धनुष यज्ञ सीता स्वयंवर के आयोजन पर युवा व्यास विदुषी ऋचा शुक्ला द्वारा व्यास पीठ से बड़े सुंदर ढंग से राम कथा प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव विभोर किया। भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ने के साथ ही राजाओं का घमंड भी तोड़ दिया। राजा जनक के प्रतिज्ञा के अनुसार महल में धनुष यज्ञ के आयोजन में भाग लेते हुए 10000 राजाओं ने एक साथ शिव धनुष उठाने का प्रयास करते हैं। परंतु सभी ने मिलकर शिधनुष को सुई की नोक के बराबर भी हिला तक नहीं पाये।
इस पर राजा जनक ने दुखी मन से कहा अब इस धरा धरती पर कोई वीर नहीं बचा है जो इस धनुष को तोड़ पावे, लगता है हमारी सीता अब कुंवारी ही रह जाएंगी। इस पर लक्ष्मण जी से रहा नहीं गया वे तम तमाते हुए भरी सभा में जनक जी से कहते हैं कि आप अपनी वाणी तुरंत वापस लीजिए इस धनुष को तोड़ने क्या बात करते हैं? इसको खंड खंड करने की क्षमता हमारे प्रभु श्रीराम में है। जो इस स्वयंवर में उपस्थित हैं। इस वाक्य को सुनकर सभी राजा आश्चर्यचकित हो जाते हैं। बातों को बढ़ते देख गुरु विश्वामित्र समझ जाते हैं अब बात बढ़ने वाली है। इस पर गुरु विश्वामित्र जी बिना विलंब किए भगवान श्रीराम को आदेश देते हैं। कि आप शिव धनुष तोड़ कर राजा जनक की पीड़ा दूर करें।
इस पर भगवान राम शिव धनुष के पास जाते हैं। धनुष का परिक्रमा कर धनुष पर हाथ लगाते हैं, परंतु इस दृश्य को किसी ने नहीं देखा कि शिव धनुष पर भगवान श्रीराम ने कब हाथ लगाया, कब तमंचा चढ़ाया, और धनुष कैसे टूट गया? धनुष टूटने की मात्र सभी राजाओं के कानों तक आवाज पहुंचती है। इसके बाद राघवेंद्र सरकार की जय जयकारो से पूरा पांडाल गूंज उठता है। तत्पश्चात माता जानकी सीता भगवान श्रीराम को वरमाला पहनाती हैं।
इसके बाद गुरु विश्वामित्र से राजा जनक जी पूछते हैं गुरुवर अब हमें क्या करना चाहिए? गुरु विश्वामित्र के कहने पर राजा जनक अपने दूत से अयोध्या राजा दशरथ को निमंत्रण पत्र भेजते हैं। राजा जनक के दूत के हाथों निमंत्रण पत्र पाकर राजा दशरथ अपार प्रसन्नता प्रकट करते हैं। निमंत्रण पत्र पाते ही राजा दशरथ बिना दूल्हे के ही बिना सोच विचार किए ही गोधूलि समय में बारात सजाकर जनकपुर हेतु प्रस्थान कर जाते हैं। बारात पहुंचते ही भगवान श्रीराम और सीता जानकी का विवाह संपन्न होते ही पूरा पांडाल जय जयकारों से गूंजने लगता है। तत्पश्चात मानस प्रवक्ता साध्वी ऋचा शुक्ला ने सभी कथा श्रोताओं को भजनों के सागर में डुबकी लगाने का भरपूर अवसर देती हैं। फिर सैकड़ों राम भक्तों द्वारा भगवान श्रीराम व अन्य देवी देवताओं की आरती उतारी जाती है। तत्पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर कथा श्रवण करने वालों में श्री लाल मौर्य, राम नारायण जायसवाल, राजू जायसवाल चूड़ामील, व्यापार मंडल के अध्यक्ष पप्पू मौर्य, शंकर गुप्ता, राजनाथ मौर्य, उमाशंकर, आकाश तिवारी, रामरक्षा केसरी, जय किशुन प्रजापति, सुनील केसरी, विष्णु यादव, पारसनाथ तिवारी, राम आशीष कोटेदार, ममता जायसवाल, किरण केसरी, सपना यादव, अंजलि तिवारी, सुमित्रा देवी, डॉ आरती जी आदि सहित सैकड़ों राम भक्तों ने कथा श्रवण कर अपने को धन्य किया।
Up 18 news report by Anand Prakash Tiwari.