वाराणसी:-अयोध्या के बाद काशी विश्वनाथ- ज्ञानवापी मामले में लगातार वाराणसी (Varanasi) के सिविल कोर्ट में सुनवाई हो रही है.वाराणसी के सिविल कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाल में ही कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता कमीशन के जरिये विवादित स्थल के वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने का आदेश जारी किया.सिविल कोर्ट के इस आदेश के बाद अब हंगामा मचा हुआ है.ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े पक्षकार इसका विरोध कर रहे हैं.अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी के जॉइंट सेकेट्री एस एम यासीन ने कहा है कि वो वीडियोग्राफी के लिए किसी को भी मस्जिद में जाने नहीं देंगे.
उनका तर्क है कि रेड जोन में स्थित इस परिसर में आज तक मुस्लिम और सुरक्षाकर्मियों के अलावा किसी ने भी प्रवेश नहीं किया है.ऐसे में वो 6 मई को होने वाले अधिवक्ता कमीशन की कार्यवाही में भी वो मस्जिद में किसी को घुसने नहीं देंगे.उस स्थल का वीडियोग्राफी कराना बिल्कुल ही गलत है.इससे मस्जिद की सुरक्षा को भी खतरा है यही वजह है कि मीडिया को भी वहां प्रवेश पर पाबंदी है.
हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है याचिका
बताते चले कि वाराणसी सिविल कोर्ट ने इस मामले में पहले 18 अप्रैल को वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया था.लेकिन जिला प्रशासन की एक आपत्ति के बाद इस कार्यवाही को रोक दिया गया.फिर इसके बाद अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने सिविल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के इस याचिका को खारिज कर दिया.
ये है पूरा मामला
जिसके बाद 26 अप्रैल को वाराणसी सिविल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई और कोर्ट ने अधिवक्ता कमीशन के जरिए श्रृंगार गौरी और उस परिक्षेत्र में स्थित दूसरे देव विग्रहों के वीडियोग्राफी और फ़ोटो ग्राफी कराने का आदेश दिया था. 6 मई को दोपहर 3 बजे कड़ी सुरक्षा इंतजाम के बीच ये कार्यवाही होनी है और 10 मई को इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी है.बताते चले कि ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी और दूसरे देव विग्रह के नियमित दर्शन पूजन की मांग को लेकर पांच महिलाओं ने इस मामले में अगस्त 2021 में वाराणसी के सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने ये आदेश दिया है.
UP 18 NEWS से अखिलेश मौर्य की रिपोर्ट