लक्ष्मी नारायण यज्ञ के छठे दिन भक्तों का उमड़ा जन सैलाब।
सोनभद्र(विनोद मिश्रा)
विकासखंड कर्मा के करनवाह गांव मेंचल रहे श्री महालक्ष्मी नारायण यज्ञ के छठवें दिन सुबह से ही भक्तों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा करना शुरू कर दिया।यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने के बाद हवनात्मक यज्ञ में लोगों ने भाग लिया। महालक्ष्मी एव्ं नारायण के हवन करने से मनो कामना पूर्ण होती है। क्षेत्र के मदैनिया,रानीतारा ,पटेहरा ,पगिया,सिरसियाठकुराई,धौरहरा,भरकवाह, कर्मा ,आदि गांवो से भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा ।रात में यज्ञ अधिष्ठाता स्वामी सुग्रीवानंद जी महाराज के द्वारा संगीत मय प्रवचन के दौरान धनुष यज्ञ की कथा सुनाई गयी।संत द्वारा रामभक्ति के गंगा में डुबकी लगाते हुए राम कथा में बताया कि भगवान राम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के साथ फुलवारी मे गए थे।उसके बाद सीता जी गौरी पूजन करने गयी थी।राजा जनक द्वारा प्रण किया गया था कि जो शिव जी के धनुष को तोड़ देगा उसी के साथ सीता का विवाह होगा।धनुष तोड़ने के लिए राजगण स्वयम्बर मे पहुँचे लेकिन धनुष को तोड़ नहीं सके।भगवान राम द्वारा धनुष् तोड़ने एव्ं स्वयंबर की कथा सुनाई गयी।यज्ञ एव्ं हवन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।
रात एवं दिन में यज्ञ के दौरान भंडारा कियाजाता है।यजमानगोपाल सिंह वैद्य, रविंद्र बहादुर सिंह, संजय सिंह, रोहित सिंह, भैया लाल सिंह, संतोष सिंह,समेत दर्जनो लोगों ने हवन किया।यज्ञाचर्य दयाशंकर शुक्ल एव्ं सहयोगी आचार्यो द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार से स्थापित देवी, देवताओ का पूजन कराया गया।लक्ष्मीनारायण का यज्ञ करने से मनुष्य को मन वांछितफल की प्राप्ति होती है।