शासन के निर्देश के बावजूद डॉक्टरों की मनमानी से मरीज हो रहे हलकान।
सोनभद्र( विनोद मिश्रा )
सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बाहर की दवा ना लिखी जाए, अस्पताल में उनके साथ दुर्व्यवहार ना किया जाए, अस्पताल में ही सारी दवाएं मिल जाये इसके लिए सरकार का स्पष्ट निर्देश है। सरकार के निर्देश के बावजूद भी शासन के निर्देशों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं सरकारी अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारी ।सरकार भले ही आरोग्य मेला का आयोजन मरीजों के उचित स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आयोजित करा रही हो। बावजूद इसके सरकारी अस्पतालों में मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है । अस्पताल में डॉक्टर की मनमानी तो कहीं दवाओं का अभाव से मरीज की जेब ढीली हो जा रही है। बीते दिनों जिला अस्पताल में बाहर की दवाई लेने के लिए मरीजों को विवश किया गया, तो प्राइवेट अस्पतालों में जाने की बात कह गई तो भाजपा नेता के हो-हल्ला के बाद अधिकारियों की नींद खुली और संबंधित को फटकार लगाई । परंतु कुछ देर बाद घोरावल से आपसी विवाद कर पहुंचे पीड़ितों परिवारों से डॉक्टरी रिपोर्ट बनवाने के लिए मोलभाव होने लगा ।पीड़ित परिवार के हो हल्ला से स्वास्थ्य अधिकारी ने पुनः संज्ञान लिया और डॉक्टर साहब का 1 दिन का वेतन रोकने का निर्देश दे दिया। एक तरफ शासन व जिला अस्पताल के मुखिया के द्वारा सभी प्रकार की दवाओं की उपलब्धता का हवाला दिया जाता है तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ अलग है जिसके कारण झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी कट रही है ।मेहरबान डा0 जाँच के नाम पर मोटी रकम वसूल कर ,जाँच रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दे रहे हैं।जहां योगी सरकार लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए सोच रही है ,भरे मंच से ऐलान भी कर रही है परंतु ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है ।स्वास्थ्य स्वास्थ्य मंत्री व उपमुख्यमंत्री भले ही औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए संबंधित को फटकार लगाते हुए नजर आ रहे हो, परंतु डॉक्टर व स्वास्थ्य अधिकारी बेखौफ होकर सरकार की योजनाओं और सुविधाओं पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।