आशीष मोदनवाल पत्रकार
योग सिर्फ करना ही नहीं है , योग को जीना ही सच्चा योग है — योगगुरु प्रशांत जी
21 जून, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के शुभ अवसर पर, योगा नेशन स्कूल, सिंगापुर के संस्थापक योगगुरु प्रशांत जी ने एक भव्य योग सत्र का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों योगप्रेमियों ने भाग लिया। यह आयोजन केवल आसनों के अभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें योग की वास्तविक भावना और उसके जीवनपरक दर्शन को भी प्रस्तुत किया गया।
इस विशेष अवसर पर योगगुरु प्रशांत जी ने कहा:
“योग केवल मैट पर किया जाने वाला अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण जीवन दर्शन है। इसे केवल शरीर की चेष्टा के रूप में न देखकर जीवन के हर पहलू में आत्मसात करना ही सच्चा योग है।”
उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को यह समझाया कि योग कोई एक घंटे की दिनचर्या नहीं, बल्कि यह एक ऐसी जीवनशैली है, जो मनुष्य को संतुलन, शांति, और स्वास्थ्य की ओर ले जाती है। योग को केवल शारीरिक लाभों तक सीमित रखना उसके व्यापक प्रभाव को सीमित कर देना है।
योगगुरु प्रशांत जी ने यह भी कहा कि:
“योग करना नहीं है, योग को जीना है — जब हर विचार, हर कर्म, और हर संबंध में समता और सजगता हो, तब ही हम वास्तव में योग में स्थित होते हैं।”
इस योग सत्र में प्राचीन भारतीय योग परंपराओं जैसे प्राणायाम, ध्यान, सूर्य नमस्कार, त्राटक और आत्मचिंतन को शामिल किया गया, जिससे साधकों को बाह्य और आंतरिक शांति का अनुभव हुआ।
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य लोगों को यह प्रेरणा देना था कि योग कोई प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक सच्चा आंतरिक अनुशासन है, जो हर मनुष्य को अपने भीतर के दिव्यता से जोड़ता है।