भीषण गर्मी में पानी के संकट से जूझ रहे मकरा गांव के लोग व फ्लोराइड युक्त पानी पीने को विवश हैं।
सोनभद्र (विनोद मिश्र)
जनपद सोनभद्र में सरकार के लाख दावों के बीच एक जमीनी हकीकत जहा एक तरफ देश आजादी के बाद से अब तक हम भले ही दुनिया में अपना परचम लहरा रहे हों मगर आज भी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कई इलाकों के लोगों को जिंदा रहने के लिए पानी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है । आज हम भले ही आजादी का अमृत महोत्सव मनाया रहे हों मगर आज भी कई इलाकों में लोग शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं, उन्हें आज तक शुद्ध पानी नसीब नहीं हुआ ।यह मामला है जनपद सोनभद्र का दुरूह क्षेत्र मकरा मड़हिया टोला है, जहां आज भी लोग चुहाड़ का पानी पीने को मजबूर हैं । क्योंकि उनकी आवाज इतनी बुलंद नहीं और आज तक उस टोले में अधिकारी से लेकर नेता तक पहुंचे नहीं ।पिछले साल मकरा के दूसरे टोले में पानी की वजह से लगभग 40 लोगों ने अपनी जान गवाई थी । मौत के बाद काफी हड़कम्प भी मचा था । जिसके बाद जांच टीमें आकर मकरा में जांच भी की लेकिन कोई यह नहीं बता सका कि आखिर इन गरीब आदिवासी लोगों के मौत का जिम्मेदार कौन है ? और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । हालांकि क्षेत्र के विधायक व राज्य मंत्री समाज कल्याण संजीव गोंड़ ने कार्यवाही का आश्वासन जरूर दिया था लेकिन आज तक कार्यवाही करा नहीं सके।मकरा एक बार फिर चर्चाओं में है । क्योंकि सामने बरसात है और उस समय लोगों को डैम का पानी पीना पड़ता है, जिससे लोग बीमार होते हैं । और फिर बीमारी की दशा में उनका जीवन बेहद कष्टकारी हो जाता है । क्योंकि मकरा मड़हिया टोले में जाने का कोई रास्ता ही नहीं है । महिलाओं का कहना है कि गंभीर बीमारी व डिलेवरी के समय मरीजों को चारपाई पर लिटाकर ले जाना पड़ता है, और इस दौरान खराब रास्ते की वजह से कभी-कभी रास्ते में ही डिलेवरी हो जाता है ।वहीं प्रधान का कहना है कि समस्याओं को लेकर कई बार अधिकारी के पास गए लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला 40 लोगों के मौत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक गंभीर नहीं है । जहां डीपीआरओ सोनभद्र ने पिछली मौत के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं वहीं सीएमओ इस बार बरसात से पहले क्षेत्र में टीम भेज कर छिड़काव व जांच कराने की बात कह रहे है।बहरहाल देश आजादी का अमृत महोत्सव मनाया रहा है । लेकिन जिस तरह से सोनभद्र में लोगों को अब तक शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है । ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब देश के अंतिम व्यक्ति तक शुद्ध जल मुहैया हो सकेगा । क्योंकि तभी सही मायने में अमृत महोत्सव पूरा हो सकेगा ।