Friday, August 29, 2025

भू माफियाओं के खिलाफ

पीड़ित ने भू माफियाओं के खिलाफ एसएसपी को सौंपा पत्र, नहीं हुई कोई कार्यवाही

 

पीड़ित ने अपने भूमि सहित अपने जान-माल की सुरक्षा के लिए कप्तान से लगाई गुहार

 

प्रयागराज।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में आजकल भू माफियाओं का आतंक जोरो सोरो से देखने को मिल रहा है। गुरुवार को भू माफियाओं द्वारा जालसाजी का बड़ा मामला प्रकाश में आया है। सोनभद्र निवासी पीड़ित अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उनके पिता सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने लगभग 4 वर्ष पूर्व प्रयागराज के रसूलपुर मरियाडीह उपरहार थाना पुरामुफ्ती तहसील सदर जनपद में एक जमीन खरीदी थी। जिसकी रजिस्ट्री एवं दाखिल खारिज सन 2018 हुआ था।और पिछले चार साल से पीड़ित अपने भूखंड पर काबिज है।परंतु कुछ दिन पहले ज्ञानचंद्र गोस्वामी एवम रामचंद्र गोस्वामी भू माफियाओ द्वारा मेरी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई। जिसकी सूचना मिलते ही तत्कालीन मैंने पीआरबी डायल 112 नंबर पर तथा क्षेत्रीय पुलिस प्रशासन को दिया। भू माफियाओ के खिलाफ प्रार्थना पत्र क्षेत्रीय पुलिस को दिया। लेकिन मुझे पीड़ित को पुलिस की तरफ से संतोषजनक मदद नहीं मिली। तत्पश्चात जब मैने अपने भवन का निर्माण कार्य करना शुरू किया तो भूमाफियाओ के काफिले द्वारा मुझ पीड़ित की जमीन पर पहुंच कर डराया धमकाया गया है। फिर मौके पर काम कर रहे लेबर मिस्त्री को धमका के काम रुकवा दिया गया। तत्पश्चात मैंने लिखित प्रार्थना पत्र लेकर एसएसपी प्रयागराज से मुलाकात कर सिटी एसपी अभिषेक भारती से मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी देते हुए, मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। सिटी एसपी द्वारा मुझ पीड़ित को आश्वासन दिया गया की आप अपना निर्माण कार्य को जारी रखे। इस पूरे मामले के अलावा पीड़ित का यह भी कहना था कि मेरी सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया और इस समय मेरी जान-माल दोनों का खतरा मेरे ऊपर बना हुआ है। और अगर मुझे कुछ भी होता है तो इसका जिम्मेदार पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यहां यह उठता है कि जहां पर उत्तर प्रदेश कि सूबे की सरकार भू माफियाओं के खिलाफ अभियान चला रही है। तो वहीं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भू माफियाओं के आतंक से आम जनमानस परेशान है। अब देखना यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा क्या ठोस कदम उठा कर कार्रवाई की जाती है। या सिर्फ खानापूर्ति कर मामले को टरका दिया जाता है।

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