Friday, August 29, 2025

सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओ पर बैन का खेल काली शंकर उपाध्याय की कलम से

सिंगल यूज प्लास्टिक पर सरकार ने बैन लगाया है जैसा कि आप और हम सब लोग जानते हैं इस समय सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक बंदी के लिए लगातार कार्य कर रही है और यह सरकार का सराहनीय कदम भी है लेकिन क्या नीचे के आला अधिकारी इस पर अच्छे से कार्य कर रहे हैं बिल्कुल यह सवाल संदेह के घेरे में है मैं अपने आप बीती एक तथ्य आप लोगों के सामने रखना चाहता हूं मैं खुद सब्जी की दुकान पर सब्जी ले रहा था और सब्जी वाले ने हमसे कहा  भाई साहब आप झोला लेकर आए है हमने कहा नहीं हम झोला  नही लाए है, सब्जी वाला बोला साहब आप को पता तो होगा की प्लास्टिक सरकार ने बंद कर दिया है, हमने कहा हां बिल्कुल पता है फिर उसने कहा साहब संबंधित  विभाग वाले आते हैं ,और चालान काट देते हैं ,जुर्माना लगा देते हैं इसलिए हम लोग प्लास्टिक नहीं रखते हैं, लेकिन चोरी-छिपे प्लास्टिक हर जगह मिल जाता  है सब्जी वाले ने कहा साहब अगर प्लास्टिक की कंपनी बंद हो जाती तो कोई वहां से नहीं लेकर आता क्या इन अधिकारियों को  पता नहीं रहता कि प्लास्टिक की कंपनी से ही हम लोगों के पास प्लास्टिक आती है, उसकी बातों पर हमने भी बहुत विचार किया तो सोचा एक छोटा सा लेख इस पर लिखा जाना चाहिए,

सरकार के प्लास्टिक बैन का मैं पुरजोर समर्थन करता हूं लेकिन जो छोटे छोटे व्यापारी हैं सब्जी वाले फल जूस वाले या किराने की दुकान वालों को क्यों परेशान किया जा रहा है और चालान किया जा रहा है ,

क्या आला अधिकारियों के ऊपर इस खबर का असर पड़ेगा या इन  छोटे व्यापारियों की रोजी रोटी चली जायेगी  आखिर कार बड़े फैक्ट्री वालो को क्यों परेशान नहीं किया जाता या अधिकारियों को इन सिंगल यूज प्लास्टिक की कंपनी का पता नही मालूम रहता .

इन पर लगा है बैन

प्लास्टिक स्टिक, गुब्बारों में इस्तेमाल प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाली पॉलीस्टायरीन (थर्मोकोल), प्लेट, कप, गिलास, कांटे की चम्मच, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, रैपिंग और मिठाई के बक्सों वाले पैकेजिंग फिल्म, इनविटेशन कार्ड, सिगरेट के पैकेट और 100 माइक्रोन से कम प्लास्टिक या पीवीसी बैनर इत्यादि आते है . मंत्रालय ने एक जुलाई, 2022 से पॉलीस्टीरीन और विस्तारित पॉलीस्टीरीन समेत चिह्नित एसयूपी वस्तुओं के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए पिछले साल 12 अगस्त को एक अधिसूचना जारी की थी. राष्ट्रीय राजधानी में राजस्व विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने प्रतिबंध को लागू करने के लिए क्रमशः 33 और 15 दलों का गठन किया है. दिल्ली की बात करें तो यहां प्रतिदिन 1,060 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है. राजधानी में कुल ठोस कचरे का 5.6 प्रतिशत (या 56 किलोग्राम प्रति मीट्रिक टन) एकल उपयोग प्लास्टिक होने का अनुमान है.

 

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