परहित सरिस धर्म नहिं भाई ये कहावत डा अंजना सिंह पर सटीक बैठती है ।।बहुत पहले से हमारे व्यवहार में एक सूक्ति कहावतों में कहीं जाती है कि न जाने किस वेश में नारायण मिल जाए इसके कई मायने हो सकते हैं लेकिन हर मायना कुछ ऐसा कह जाता है कि समाज को प्रेरणा देने का काम करता है ऐसी एक कहानी है बक्सा थाना क्षेत्र के गांव की निवासी पूजा की जब संसार में सब रिश्तो ने दामन छोड़ दिया तो उसका साथ देने आई एक ऐसी महिला
भी जिनकी पूजा से दूर दूर तक न कोई पहचान न ही सरोकार था बात कुछ इस तरह की है ससुराल पक्ष और मायके पक्ष की ठुकराई गई पूजा अकेलेपन में जीवन जी रही है विगत 30 अगस्त को अचानक उसके पेट में जब दर्द हुआ तो उसके जेहन में पता नहीं किन कारणों से समाज सेविका डॉ अंजना सिंह का खयाल आया परिस्थितियों से बुरी तरह जूझ रही पूजा को डॉ अंजना मे एक उम्मीद की किरण दिखी और उसने बिना देर किए डॉ अंजना को फोन कर अपनी बिगड़ती हालत की पूरी जानकारी दी स्थिति को भागते हुए डॉ अंजना ने माननीय धर्म को स्वाभाविक रिश्ता मानकर तत्काल उसे इलाज हेतु चिकित्सक के यहां लेकर पहुंची जहां उसकी जांच कराते हुए प्राथमिक उपचार दिलाकर बगैर किसी स्वार्थ या सहयोग के पीड़िता को घर भेज दिया किंतु दूसरे दिन पुनः पूजा की हालत बिगड़ गई पूजा के पेट में दर्द शुरू हो गया पूजा के जेहन में पहले दिन से मन मस्तिष्क पर अंजना सिंह की छाप पड़ गई थी इसलिए फिर अंजना सिंह को पूजा ने फोन किया और अपनी यथास्थिति से अवगत कराया डॉ अंजना ने अपने कुछ पदाधिकारियों के साथ पूजा को तुरंत एक निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया और उसकी जांच और इलाज करवाया डॉक्टर द्वारा बताया गया की पूजा के लीवर आंत में इन्फेक्शन हो गया जिसकी वजह से गंदगी जमा हो गई थी देर करती तो दिक्कतें बढ़ जाती अंजना सिंह ने पूजा का तुरंत इलाज करवाया और पूजा की हालत में सुधार आया इस बाबत पूजा का कहना है कि डॉ अंजना मैडम ने मुझे जीवन दान दिया है इन्होने मेरी या मुझ जैसी असहाय और गरीब लोगों की हमेशा मदद की है आज मैडम की वजह से मेरी जान बच गई। मैं कोटि-कोटि धन्यवाद करती हूं





