Friday, August 29, 2025

मैने सीखा मौसम से जो रहता नही एक समान,

सब दिन होत न एक समान

मैने सीखा मौसम से जो रहता नही एक समान,

हमारा जीवन मौसम सा परिवर्तन सब करो सम्मान।

आज जीवन में बड़ी तपन है तो न धबराना प्यारे,

हिम्मत रखना डटे रहना मिट जाएगें गर्दिश के तारे।

जीवन के दिन धूप छाँव से आते और जाते रहते,

पथिक बन हम सब काहे यह सन्देश समझ न पाते।

वनउपवन जाकर जब देखा पतझड से सब मुरझाए,

मैने देखा समय कुछ बाद बाग बगीचा सब हरियाए।

तब जाना महसुस किया सब दिन होत न एक समान,

न डरना अब न रूकना तन मन से बन जाओ बलवान।

हर्षित होकर मानव सेवा कर जग में होगा तेरा नाम ,

मानव जीवन पाकर व्यर्थ न जाए आओ सबके काम।

जीवन मे ठंडे ठंडे बादल समान दिन जल्दी ही आएगें,

‘रश्मि ‘सखीयन संग मिल जुल कजरी मल्हार गाएंगे।

डॉक्टर रश्मि शुक्ला(समाज सेविका)
सामाजिक सेवा और संस्थान (अध्यक्ष)
प्रयागराज
उत्तर प्रदेश

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